कांग्रेस का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध तेज करने के लिए कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के कई दलों ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान किया। राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रस्तावित प्रदर्शन में अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं के शामिल होने की बात कही गई। विपक्ष मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है।

Oct 12, 2026 - 12:43
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कांग्रेस का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस सहित INDIA ब्लॉक के कई दलों ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस प्रदर्शन की घोषणा करते हुए युवाओं, विपक्षी दलों, सिविल सोसाइटी और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की। विपक्ष मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है।

प्रस्तावित मार्च में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना के संजय राउत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एम.ए. बेबी सहित कई नेताओं के शामिल होने की बात कही गई। खबर के अनुसार, अन्य विपक्षी नेताओं के भी प्रदर्शन में पहुंचने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, सभी नेताओं की वास्तविक उपस्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।

मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध

विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों और SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहती है। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, इन आरोपों और आपत्तियों पर संबंधित पक्षों की विस्तृत प्रतिक्रिया इस समाचार सामग्री में उपलब्ध नहीं है।

राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं ने इससे पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया था। दी गई जानकारी के अनुसार, 6 अक्टूबर को कांग्रेस नेताओं ने विरोध जताया था। उस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के आकाशवाणी भवन में धरना देने का उल्लेख किया गया। इसके बाद विपक्ष ने 12 अक्टूबर को एक बार फिर प्रदर्शन करने की घोषणा की।

CJI सूर्यकांत ने मुलाकात की अनुमति नहीं दी

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च से पहले विपक्षी नेताओं को एक झटका तब लगा, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं से मुलाकात करने से इनकार कर दिया। विपक्षी नेता कथित वोट चोरी, मतदाता सूची में गड़बड़ियों और SIR से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखना चाहते थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इसी तरह के मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे मामलों पर अदालत के बाहर चर्चा करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करना उचित होगा।

इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों के प्रस्तावित मार्च को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई। विपक्ष इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी में था, जबकि न्यायपालिका की ओर से संबंधित मामलों को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उठाने की बात कही गई।

राजनीतिक टकराव के बीच बढ़ी हलचल

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की घोषणा ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मतदाता सूची तथा SIR प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सार्वजनिक मंच पर उठा रहे हैं। दूसरी ओर, अदालत में विचाराधीन मामलों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने की बात कही गई है। अब इस मुद्दे पर विपक्ष की आगे की रणनीति और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।