दिल्ली साइबर ठगी और हनी ट्रैप केस में बड़ा खुलासा, महिला जज पर गंभीर आरोप

दिल्ली में ₹52.81 लाख की साइबर ठगी और कथित हनी ट्रैप मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि पीड़िता हरियाणा की एक महिला न्यायिक अधिकारी हैं, जिन्होंने कथित बदनामी के डर से अपनी पहचान छिपाते हुए अपनी नौकरानी के नाम पर FIR दर्ज कराई थी। कोर्ट में डिजिटल ट्रांजैक्शन ट्रेल सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

Jun 13, 2026 - 16:01
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दिल्ली साइबर ठगी और हनी ट्रैप केस में बड़ा खुलासा, महिला जज पर गंभीर आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली में सामने आए एक हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी और कथित हनी ट्रैप मामले ने कानून व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में ₹52.81 लाख की ठगी का आरोप है, जिसमें जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है।

पुलिस जांच और अदालत की सुनवाई के अनुसार, इस केस की शुरुआत एक एफआईआर से हुई थी जो घरेलू सहायिका के नाम पर दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए एक व्यक्ति द्वारा धोखाधड़ी की गई है। बाद में जांच में खुलासा हुआ कि असली पीड़िता कोई और नहीं बल्कि हरियाणा की एक महिला न्यायिक अधिकारी हैं।

जांच एजेंसियों ने जब बैंक लेन-देन और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहराई से पड़ताल की, तो पाया कि रकम घरेलू सहायिका के खाते से नहीं बल्कि न्यायिक अधिकारी के निजी बैंक खाते से ट्रांसफर हुई थी। इस खुलासे के बाद केस की दिशा पूरी तरह बदल गई।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान डिजिटल मनी ट्रेल को अहम सबूत माना गया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों को स्पष्ट होने के बावजूद, पीड़िता, आरोपी और जांच प्रक्रिया के चलते केस अनावश्यक रूप से जटिल हो गया। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मामला इतना स्पष्ट था, तो प्रारंभिक स्तर पर सही तथ्य क्यों सामने नहीं लाए गए।

आरोपी दीपक वत्स ने अदालत में दावा किया है कि उसकी मुलाकात महिला से ऑनलाइन डेटिंग ऐप पर हुई थी, जहां कथित रूप से फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से बातचीत शुरू हुई। आरोप है कि बातचीत के दौरान दोनों के बीच संबंध बने और इसके बाद पैसों का लेन-देन हुआ।

हालांकि, इस दावे की पुष्टि अभी जांच के अधीन है और पुलिस सभी डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। वहीं दूसरी ओर, अदालत की टिप्पणियों के बाद मामले में कई नए सवाल उठ खड़े हुए हैं, खासकर यह कि आखिर वास्तविक परिस्थितियों को छिपाने की कोशिश क्यों की गई।

यह मामला न केवल साइबर ठगी की जटिलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले संपर्क किस तरह कानूनी और व्यक्तिगत विवादों को जन्म दे सकते हैं। फिलहाल, जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी हैं और आगे की कार्रवाई कोर्ट के आदेशों पर निर्भर करेगी।