अस्थायी बिजली लाइन का तार टूटने से फैला करंट, चार पशुओं की मौत; विद्युत विभाग पर लापरवाही के आरोप

नेपानगर के सीवल ग्राम पंचायत के नवाड़ क्षेत्र में अस्थायी विद्युत लाइन का तार टूटने से करंट फैल गया, जिससे चार पशुओं की मौत हो गई। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे और कार्रवाई की मांग की है।

Jul 30, 2026 - 18:15
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अस्थायी बिजली लाइन का तार टूटने से फैला करंट, चार पशुओं की मौत; विद्युत विभाग पर लापरवाही के आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. महेश किनगे, नेपानगर l नेपानगर क्षेत्र की सीवल ग्राम पंचायत के नवाड़ इलाके में अस्थायी विद्युत आपूर्ति लाइन का तार टूटने से बड़ा हादसा हो गया। बुधवार शाम करीब 6 बजे टूटे हुए तार में अचानक करंट प्रवाहित होने से चार पशुओं की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

जानकारी के अनुसार, राहगीरों ने सबसे पहले मृत पशुओं को देखा और इसकी सूचना संबंधित पशुपालकों को दी। बताया जा रहा है कि पहले टूटे हुए तार में बिजली आपूर्ति बंद थी, लेकिन अज्ञात कारणों से अचानक उसमें करंट दौड़ गया। करंट की चपेट में आने से हरि लक्ष्मण की एक भैंस, तुलसीराम अंतया का एक बैल तथा महेंद्र तायडे की दो भैंसों की मौत हो गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि नवाड़ क्षेत्र में अतिक्रमण कर रह रहे लोगों को भी बिना आवश्यक जांच के अस्थायी विद्युत कनेक्शन उपलब्ध करा दिए गए। उनका कहना है कि विद्युत विभाग ने नियमों की अनदेखी करते हुए बिजली आपूर्ति शुरू की, जिससे यह गंभीर हादसा हुआ। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले आए आंधी-तूफान के दौरान बिजली के तार टूटकर नदी में गिर गए थे। इसके बावजूद विभाग ने न तो तारों को हटाया और न ही उनकी मरम्मत की। बाद में अचानक उन्हीं तारों में बिजली प्रवाहित हो गई, जिससे यह दुर्घटना हुई।

स्थानीय लोगों के अनुसार, वन विभाग की भूमि पर बने अतिक्रमण क्षेत्र में अस्थायी बिजली लाइन बिछाई गई है। इस व्यवस्था पर पहले भी आपत्ति जताई जा चुकी थी। पूर्व प्रशिक्षु रेंजर अजय गुप्ता ने विद्युत विभाग को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया था कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का विद्युत कनेक्शन देने से पहले वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना आवश्यक है। इसके बावजूद बिजली आपूर्ति जारी रखी गई।

हादसे के बाद प्रभावित पशुपालकों ने प्रशासन और विद्युत विभाग से उचित मुआवजा देने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते टूटे हुए तारों की मरम्मत कर दी जाती और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो चार बेजुबान पशुओं की जान बचाई जा सकती थी।

ग्रामीणों ने मांग की है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्षेत्र की सभी अस्थायी विद्युत लाइनों की जांच कराई जाए और जर्जर तारों को तत्काल बदला जाए। फिलहाल घटना के बाद क्षेत्र में लोगों में आक्रोश है और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।