महाविद्यालय के अध्यक्ष राजन कुमार दुबे की शिकायत के अनुसार, 12 अप्रैल 2025 को कॉलेज के आधिकारिक ईमेल पर एचसीएल टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग के नाम से एक मेल आया था। इसमें कॉलेज में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया था। मेल में वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति का मोबाइल नंबर भी दिया गया था। प्रस्ताव मिलने के बाद कॉलेज प्रबंधन की उससे लगातार बातचीत होने लगी। इसके बाद 17 अप्रैल को कॉलेज के ईमेल पर एक समझौता पत्र भेजा गया और अगले दिन कॉलेज के भौतिक निरीक्षण की जानकारी दी गई।
18 अप्रैल को एके साहू नाम का व्यक्ति कॉलेज पहुंचा और उसने कॉलेज की बिल्डिंग व परिसर का मुआयना किया। बताया गया कि वह निरीक्षण रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद 1 मई को कॉलेज अध्यक्ष और प्राचार्य कामेश्वर नाथ मिश्रा की जूम बैठक हुई, जिसमें एचसीएल टेक्नोलॉजी की अनीता नाम की महिला से बातचीत होने की बात शिकायत में कही गई है। इसके बाद 5 मई को गोपनीयता और साझेदारी से संबंधित दस्तावेज कॉलेज के ईमेल पर भेजे गए। कॉलेज प्रबंधन ने 8 मई को दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर उन्हें वापस भेज दिया।
इसके बाद कॉलेज से अलग-अलग मदों में रकम जमा कराने को कहा गया। 19 मई को परीक्षा सेंटर के उपकरणों के लिए 5 लाख 98 हजार 743 रुपये का बिल भेजा गया और भुगतान के लिए एक निजी फर्म का बैंक खाता उपलब्ध कराया गया। कॉलेज ने 21 मई को अपने बैंक खाते से इस रकम का भुगतान कर दिया। इसके बाद डीजी सेट के नाम पर 3 लाख 42 हजार 200 रुपये की मांग की गई। कॉलेज ने 26 मई को यह राशि भी संबंधित खाते में जमा कर दी। इस तरह इन दोनों भुगतानों के जरिए कॉलेज से 9 लाख 40 हजार 943 रुपये लिए जा चुके थे।
इसके बाद ठगी की रकम और बढ़ती गई। 11 जून को कॉलेज प्रबंधन को सामान भेजने और बीमा के नाम पर अलग-अलग रकम जमा करने के लिए कहा गया। परिवहन के नाम पर 1 लाख 35 हजार 700 रुपये और बीमा के नाम पर 1 लाख 62 हजार 840 रुपये मांगे गए। शिकायत के अनुसार कॉलेज ने 13 जून को दोनों रकम का भुगतान कर दिया। इन दोनों भुगतानों की कुल राशि 2 लाख 98 हजार 540 रुपये थी। इस तरह पहले से जमा रकम के साथ कॉलेज प्रबंधन से करीब 12 लाख 39 हजार रुपये की राशि विभिन्न मदों में जमा कराई गई।
शिकायत के मुताबिक 12 अप्रैल से 14 जून तक कॉलेज प्रबंधन की वेदांत कपूर नामक व्यक्ति से लगातार बातचीत होती रही। लेकिन 15 जून के बाद संबंधित मोबाइल नंबर बंद हो गया और ईमेल का जवाब भी आना बंद हो गया। संपर्क पूरी तरह टूटने के बाद कॉलेज प्रबंधन को कथित ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद मामले की शिकायत नेवई थाने में की गई।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस भुगतान के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ईमेल आईडी और भेजे गए दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है। जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल थे और कॉलेज प्रबंधन से ली गई रकम किन खातों में पहुंची। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ मामले से जुड़े अन्य तथ्यों के सामने आने की उम्मीद है।