पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों पर बंदी की कार्रवाई, 100 को कारण बताओ नोटिस; सर्वे के बाद सरकार का बड़ा कदम

पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षा संस्थानों के राज्यव्यापी सर्वे के बाद सरकार ने 252 मदरसों के खिलाफ बंदी की कार्रवाई शुरू की है। वहीं 100 अन्य संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर वैध पंजीकरण और प्राधिकरण से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। कार्रवाई को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

Sep 14, 2026 - 08:29
Sep 14, 2026 - 08:31
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पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों पर बंदी की कार्रवाई, 100 को कारण बताओ नोटिस; सर्वे के बाद सरकार का बड़ा कदम

UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षा संस्थानों की समीक्षा और सत्यापन प्रक्रिया के बाद राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। रिपोर्टों के मुताबिक, राज्यव्यापी सर्वे के पहले चरण में 252 मदरसों को बंद करने की कार्रवाई के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा 100 अन्य मदरसा संस्थानों को कारण बताओ नोटिस भेजकर वैध पंजीकरण, प्राधिकरण और संचालन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। सरकार की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री खुदीराम टुडू के अनुसार, मदरसों की जांच के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं के आधार पर 252 संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि कार्रवाई के दायरे में आने वाले मदरसों में बड़ी संख्या खारिजी संप्रदाय से जुड़े संस्थानों की है। हालांकि, संबंधित संस्थानों की ओर से इस कार्रवाई और सर्वे के निष्कर्षों को लेकर क्या पक्ष रखा गया है, इसकी जानकारी उपलब्ध सामग्री में विस्तार से नहीं दी गई है।

जिलावार आंकड़ों के अनुसार, मालदा में सबसे अधिक 44 मदरसे कार्रवाई के दायरे में बताए गए हैं। इसके बाद उत्तर दिनाजपुर में 37 और दक्षिण 24 परगना में 32 मदरसों को नोटिस जारी किए गए हैं। नदिया और मुर्शिदाबाद में 25-25 मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार की सत्यापन प्रक्रिया कई जिलों में संचालित मदरसा संस्थानों तक पहुंची है।

सरकार ने 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन संस्थानों से वैध प्राधिकरण और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। सरकार के अनुसार, यदि संबंधित संस्थान निर्धारित दस्तावेज और वैध संचालन से जुड़े प्रमाण उपलब्ध कराने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ भी बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में इन 100 संस्थानों के लिए आगे की कार्रवाई उनके दस्तावेजों और सरकार के सत्यापन के आधार पर तय होने की बात सामने आई है।

राज्यव्यापी सर्वे के दौरान मदरसा प्रबंधन, छात्रों के नामांकन, वित्तीय स्रोत और संस्थानों की पंजीकरण स्थिति की जांच किए जाने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 2,132 मदरसे वैध अनुमोदन के साथ संचालित बताए गए हैं, जबकि 2,396 मदरसों को गैर-अनुमोदित बताया गया है। सरकार की ओर से जारी कार्रवाई इसी व्यापक सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा बताई जा रही है।

मदरसों पर कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। भाजपा नेताओं ने कार्रवाई को सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए इसे जरूरी कदम बताया है। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष ने मदरसों को एक शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बताते हुए उन्हें आतंकवाद से जोड़ने वाली टिप्पणियों का विरोध किया है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी के कारण मामला राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

फिलहाल 252 मदरसों पर बंदी की कार्रवाई और 100 संस्थानों को जारी कारण बताओ नोटिस के बाद पश्चिम बंगाल की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। सरकार द्वारा मांगे गए दस्तावेजों और सत्यापन के आधार पर 100 मदरसों के संबंध में अगला फैसला लिया जा सकता है। साथ ही सर्वे में गैर-अनुमोदित बताए गए संस्थानों को लेकर भी आने वाले समय में कार्रवाई का दायरा बढ़ने की संभावना है।