BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग का भारत-चीन रिश्तों पर बड़ा संदेश, Global South की एकजुटता पर जोर

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने और Global South की एकजुटता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, सभी देशों के लिए समान अंतरराष्ट्रीय नियम, WTO सुधार, वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी और AI तथा जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताई।

Sep 13, 2026 - 17:06
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BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग का भारत-चीन रिश्तों पर बड़ा संदेश, Global South की एकजुटता पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों के साथ-साथ Global South की बढ़ती भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत को BRICS बैठक की मेजबानी के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि दुनिया तेजी से ऐतिहासिक बदलावों के दौर से गुजर रही है। उनके संबोधन में विकासशील देशों की एकजुटता, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और वैश्विक शासन में सभी देशों की समान भागीदारी पर विशेष जोर दिखाई दिया।

शी जिनपिंग ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और कोई भी देश या शक्ति हमेशा प्रभावशाली नहीं रह सकती। उनके अनुसार विकासशील देशों की एकजुटता और बढ़ता प्रभाव दुनिया को बहुध्रुवीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने BRICS देशों से अपील की कि वे विकासशील देशों को एकजुट करने और वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएं। उनके बयान को Global South के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

चीनी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और वैश्विक व्यवस्था में समान भागीदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम किसी एक शक्तिशाली देश के हितों के अनुसार तय नहीं होने चाहिए, बल्कि सभी देशों की भागीदारी से बनाए जाने चाहिए। उन्होंने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था की तुलना ऐसे चौराहे से की जहां ट्रैफिक लाइट नहीं हो और इससे अराजकता पैदा होने की आशंका रहती है। शी ने संप्रभुता के सम्मान, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करने की आवश्यकता बताई।

शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की मांग भी रखी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षवाद को मजबूत करने की वकालत करते हुए विश्व व्यापार संगठन यानी WTO में सुधार तथा निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने New Development Bank को समर्थन देने की बात कही, ताकि विकासशील देशों की वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में आवाज और प्रतिनिधित्व को मजबूत किया जा सके। उनका जोर ऐसी वैश्विक व्यवस्था पर रहा जिसमें विकासशील देशों की भूमिका और भागीदारी बढ़े।

अपने संबोधन में चीनी राष्ट्रपति ने सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने 2030 Sustainable Development Goals यानी SDGs की दिशा में काम करने पर जोर दिया। शी ने चीन की Global Development Initiative का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत 120 से अधिक देशों में 2,000 से ज्यादा परियोजनाएं पूरी की गई हैं। इसके जरिए विकासशील देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की चीन की नीति को भी रेखांकित किया गया।

AI और जलवायु परिवर्तन जैसे उभरते वैश्विक मुद्दे भी शी जिनपिंग के संबोधन का हिस्सा रहे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास मानव कल्याण के लिए होना चाहिए और इसके इस्तेमाल को लेकर वैश्विक स्तर पर सहमति आधारित नियम बनाए जाने चाहिए। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भी उन्होंने देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई। BRICS Summit में दिए गए उनके संदेश में वैश्विक दक्षिण की एकजुटता, बहुपक्षीय व्यवस्था और समान भागीदारी को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा गया।