स्वामी आत्मानंद स्कूल में हादसा: लोहे का गेट गिरने से 7 वर्षीय बच्चे की मौत, जांच के आदेश

सिमगा तहसील के हथबंद गांव स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल के मुख्य गेट का लोहे का ढांचा गिरने से 7 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद सिमगा प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जर्जर पिलर और गेट की मरम्मत की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

Sep 13, 2026 - 15:12
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स्वामी आत्मानंद स्कूल में हादसा: लोहे का गेट गिरने से 7 वर्षीय बच्चे की मौत, जांच के आदेश

UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ के सिमगा तहसील क्षेत्र के हथबंद गांव स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल में हुए हादसे ने स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था और जर्जर ढांचों की देखरेख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को स्कूल के मुख्य गेट के पास खेल रहे 7 वर्षीय बच्चे की लोहे का गेट गिरने से मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। हादसे के बाद गांव में शोक का माहौल है, वहीं ग्रामीणों ने स्कूल परिसर और आसपास के जर्जर ढांचों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।

जानकारी के मुताबिक, 7 वर्षीय शिवम यादव, पिता नन्हीं यादव, निवासी रतनपुर, बिलासपुर, अपने रिश्तेदारों के यहां हथबंद आया हुआ था। शनिवार को वह स्वामी आत्मानंद स्कूल के मुख्य गेट के सामने खेल रहा था। इसी दौरान जर्जर पिलर से लगा लोहे का गेट अचानक गिर गया और बच्चा इसकी चपेट में आ गया। हादसे में बच्चे की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय स्तर पर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया।

घटना के बाद सिमगा प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार की स्थिति कैसी थी और जर्जर पिलर तथा गेट की सुरक्षा को लेकर पहले से कोई शिकायत या सूचना स्कूल प्रबंधन अथवा संबंधित विभाग को दी गई थी या नहीं। हादसे में जिम्मेदारी तय करने के लिए प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल के मुख्य गेट से जुड़े पिलर की स्थिति लंबे समय से खराब थी। ग्रामीणों के अनुसार, जर्जर पिलर और गेट की मरम्मत को लेकर पहले भी मांग उठाई जाती रही थी। उनका आरोप है कि समय रहते मरम्मत और सुरक्षा संबंधी कदम नहीं उठाए गए। हालांकि इन आरोपों की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

इस घटना ने स्कूल परिसरों में बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। सरकारी और निजी स्कूलों में भवन, गेट, पिलर, दीवार, बिजली व्यवस्था और अन्य संरचनाओं की नियमित जांच जरूरी मानी जाती है। खासतौर पर ऐसे ढांचे जो बच्चों की आवाजाही वाले स्थानों पर स्थित हैं, उनकी स्थिति की समय-समय पर जांच और आवश्यक मरम्मत सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

हथबंद की घटना के बाद ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से स्कूल परिसर और आसपास मौजूद जर्जर संरचनाओं का निरीक्षण कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी स्कूल या सार्वजनिक परिसर में सुरक्षा से जुड़ी शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और खराब संरचनाओं की समय पर मरम्मत कराई जानी चाहिए।

फिलहाल प्रशासनिक जांच के आदेश के बाद लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और हादसे के लिए किसी की जिम्मेदारी तय होती है या नहीं। हादसे में बच्चे की मौत के बाद स्कूल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का जवाब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।