स्थानीय लोगों का आरोप है कि गार्डन की स्थिति ऐसी हो गई है कि यहां इंसानों की आवाजाही कम और मवेशियों की मौजूदगी अधिक दिखाई देती है। गार्डन के रखरखाव और नियमित सफाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिस उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से ग्रीन स्पेस तैयार किया गया था, उसका लाभ क्षेत्रवासियों को मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
गार्डन में पानी निकासी की समस्या भी सामने आने की बात कही गई है। 13 सितंबर को नगर पालिका परिषद की ओर से गार्डन परिसर में नाली खोदकर पानी निकासी का काम कराया गया। स्थानीय जानकारी के अनुसार बाउंड्री वॉल की दीवार के नीचे से भी पानी निकालने के लिए खुदाई की गई। हालांकि इस कार्य को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाते हुए कहा है कि समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय फिलहाल पानी निकासी के लिए कामचलाऊ व्यवस्था की जा रही है।
लोगों के अनुसार बारिश के दौरान गार्डन परिसर में पानी जमा होने की समस्या सामने आती है। ऐसे में केवल नाली खोदने या अस्थायी रूप से पानी निकालने की व्यवस्था करने के बजाय जल निकासी की पूरी योजना बनाकर स्थायी समाधान किए जाने की जरूरत है। यदि पानी निकासी की व्यवस्था व्यवस्थित नहीं होती है तो इसका असर गार्डन की हरियाली, परिसर की संरचना और लोगों के उपयोग पर भी पड़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ग्रीन स्पेस गार्डन के निर्माण पर जब बड़ी राशि खर्च की गई है तो उसके रखरखाव पर भी नियमित ध्यान दिया जाना चाहिए। गार्डन में साफ-सफाई, घास की कटाई, झाड़ियों की छंटाई, पौधों की देखरेख और मवेशियों के प्रवेश को रोकने के लिए आवश्यक व्यवस्था किए जाने की मांग उठ रही है। इससे क्षेत्र के लोगों को गार्डन का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
नगर पालिका परिषद से स्थानीय लोगों ने गार्डन की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को सुधारने की मांग की है। साथ ही पानी निकासी की समस्या का स्थायी समाधान, नियमित रखरखाव और परिसर को मवेशियों से सुरक्षित रखने की व्यवस्था किए जाने की अपेक्षा जताई गई है। लाखों रुपये की लागत से तैयार इस ग्रीन स्पेस को बेहतर तरीके से विकसित और उपयोगी बनाए जाने पर ही इसका उद्देश्य पूरा हो सकेगा।