जहरीली शराब कांड की न्यायिक जांच के लिए आयोग गठित, 3 महीने में देनी होगी रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों और लोगों के अस्वस्थ होने की घटना की सरकार ने न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया गया है। आयोग को तीन महीने में रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच का मुख्यालय सागर रखा गया है और तीन प्रमुख बिंदुओं पर जांच की जाएगी।

Sep 12, 2026 - 21:31
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जहरीली शराब कांड की न्यायिक जांच के लिए आयोग गठित, 3 महीने में देनी होगी रिपोर्ट

UNITED NEWS OF ASIA. मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों और लोगों के अस्वस्थ होने की घटना को लेकर राज्य सरकार ने न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। सरकार अब पूरे मामले की परिस्थितियों, घटना के कारणों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराएगी। इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश विष्णु प्रताप सिंह चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग को अपनी जांच पूरी कर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। जांच आयोग का मुख्यालय सागर में रखा गया है।

सरकार की ओर से गठित आयोग को जांच के लिए तीन प्रमुख विषय निर्धारित किए गए हैं। पहला विषय सागर में जहरीली शराब के सेवन से हुई मृत्यु और अस्वस्थता की घटना से जुड़ा है। आयोग यह पता लगाएगा कि इस घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था, घटना का स्वरूप कैसा रहा और इससे संबंधित परिस्थितियां क्या थीं। आयोग उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण कर घटना के कारणों का तथ्यात्मक निर्धारण करेगा और अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी देगा।

जांच का दूसरा प्रमुख बिंदु संबंधित क्षेत्र में तैनात आबकारी अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के दायित्वों से जुड़ा है। आयोग यह परीक्षण करेगा कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने निर्धारित कर्तव्यों का निर्वहन किस प्रकार किया। शराब के अवैध कारोबार और ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए जिन विभागों की जिम्मेदारी थी, उनके स्तर पर निगरानी और कार्रवाई की स्थिति का भी परीक्षण जांच के दायरे में रहेगा। इस जांच के आधार पर जिम्मेदारियों और प्रशासनिक स्तर पर हुई किसी संभावित चूक से संबंधित तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

आयोग के लिए निर्धारित तीसरा विषय भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने से संबंधित है। आयोग जहरीली शराब या अवैध शराब से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को लेकर आवश्यक उपायों की सिफारिश करेगा। इसमें संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जरूरी कदम सुझाए जा सकते हैं।

सरकार के इस फैसले के बाद सागर शराब कांड की जांच अब न्यायिक आयोग के स्तर पर होगी। आयोग घटना से जुड़े तथ्यों, परिस्थितियों और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली का परीक्षण करेगा। तीन महीने की समयसीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपे जाने के प्रावधान के कारण जांच प्रक्रिया को निर्धारित अवधि में पूरा करने की जिम्मेदारी भी आयोग पर होगी।

जहरीली शराब से जुड़ी घटनाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था दोनों के लिहाज से गंभीर मानी जाती हैं। ऐसे मामलों में अवैध शराब के स्रोत, उसकी निगरानी और संबंधित विभागों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है। सरकार द्वारा गठित आयोग की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सागर में हुई घटना किन परिस्थितियों में सामने आई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर किन सुधारों की आवश्यकता है। आयोग की जांच और उसकी अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।