मानव-वन्यजीव संघर्ष के बाद कान्हा टाइगर रिजर्व ने बाघिन का किया सफल रेस्क्यू, वन विहार भोपाल भेजा

बालाघाट जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना के बाद वन विभाग ने 14 वर्षीय बाघिन का सफल रेस्क्यू कर उसे वन विहार भोपाल भेज दिया। बाघिन के दांत घिस जाने के कारण उसके ग्रामीण क्षेत्रों की ओर आने की संभावना जताई गई है।

Aug 3, 2026 - 18:57
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मानव-वन्यजीव संघर्ष के बाद कान्हा टाइगर रिजर्व ने बाघिन का किया सफल रेस्क्यू, वन विहार भोपाल भेजा

UNITED NEWS OF ASIA. सायमा नाज़, बालाघाट। कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक गंभीर घटना के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए एक समस्या जनित बाघिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे वन विहार, भोपाल भेज दिया है। यह कार्रवाई ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से की गई।

जानकारी के अनुसार, 2 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि को कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन अंतर्गत खापा बफर परिक्षेत्र की कुम्हादेही बीट स्थित ग्राम पर्रापुर (स्कूल टोला), थाना बैहर, तहसील परसवाड़ा, जिला बालाघाट में बाघ के हमले में सुगनी बाई की मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया था।

घटना की जानकारी मिलते ही कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। वन विभाग की टीम ने कैमरा ट्रैप लगाए, विशेष गश्ती दल गठित किए और हाथी दल की सहायता से जंगल एवं आसपास के क्षेत्रों में सघन सर्च अभियान चलाया। तलाशी अभियान के दौरान लगभग 14 वर्ष आयु की मादा बाघिन टी-27 गांव के आसपास विचरण करती हुई मिली।

वन अधिकारियों के अनुसार, यह बाघिन पूर्व में भी कई बार ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास देखी जा चुकी थी। जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि घटना से एक रात पहले उसने गांव के निकट शिकार करने का प्रयास किया था। परिस्थितियों को देखते हुए उसे समस्या जनित वन्यजीव मानते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश शासन से रेस्क्यू और पुनर्स्थापन की अनुमति प्राप्त की गई।

अनुमति मिलने के बाद 3 अगस्त 2026 को अपराह्न में कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने विशेष अभियान चलाकर बाघिन का सुरक्षित रेस्क्यू किया। यह अभियान क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी तथा उपसंचालक (बफर) अमिता के. बी. के मार्गदर्शन में वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और हाथी दल की सहायता से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

रेस्क्यू के दौरान वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल ने बाघिन को सुरक्षित रूप से निश्‍चेत कर उसका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि बाघिन के कैनाइन दांत काफी अधिक घिस चुके हैं। अधिकारियों का मानना है कि दांत कमजोर होने के कारण वह जंगल में प्राकृतिक शिकार करने में कठिनाई महसूस कर रही थी और इसी वजह से आसान शिकार की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों की ओर आ रही थी।

वन विभाग ने ग्रामीणों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बाघिन को विशेष परिवहन वाहन के माध्यम से सुरक्षित रूप से वन विहार, भोपाल भेज दिया है। वहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी देखभाल की जाएगी।

कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधि दिखाई दे तो इसकी तत्काल सूचना वन विभाग को दें और स्वयं किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने का प्रयास न करें। विभाग ने कहा है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है और वन विभाग दोनों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।