रूसी तेल खरीद पर भारत को अमेरिकी सांसद की चेतावनी, 100% टैरिफ वाले बिल से बढ़ा दबाव
अमेरिका के प्रतिनिधि सभा ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को 262-159 मतों से मंजूरी दी है। यह कानून राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों के आयात पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन से रूसी तेल-गैस खरीद कम करने की अपील करते हुए उन्हें वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा खरीदने को कहा।
UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने से जुड़ा नया कदम सामने आया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को 262-159 मतों से मंजूरी दी है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल या गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत और चीन को इस प्रावधान के संभावित दायरे में आने वाले प्रमुख देशों के रूप में देखा जा रहा है।
बिल को लेकर अमेरिकी सांसदों की ओर से भारत को रूसी ऊर्जा खरीद के मुद्दे पर सार्वजनिक संदेश भी दिया गया है। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें रूस से तेल और गैस खरीदने के बजाय दूसरे स्रोतों से ऊर्जा खरीदनी चाहिए। उनका यह बयान अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पारित होने के बाद आया। ब्लूमेंथल इस कानून के प्रमुख समर्थकों में शामिल हैं और उन्होंने कहा है कि इसका उद्देश्य रूस के ऊर्जा कारोबार से होने वाली आय पर दबाव बढ़ाना है।
इस कानून में केवल रूस के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाने की बात नहीं है, बल्कि रूस के साथ प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाली गतिविधियों और तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। अमेरिकी सीनेट में जुलाई के दौरान इस विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए द्विदलीय समझौता हुआ था। कानून के अनुसार राष्ट्रपति उन देशों के आयात पर लक्षित टैरिफ लगा सकते हैं जो रूसी कच्चे तेल या गैस के बड़े खरीदार हैं। यह प्रावधान पांच सबसे बड़े रूसी तेल या गैस आयातकों तक सीमित किया गया है।
सीनेटर जीन शहीन भी रूस से ऊर्जा खरीद के मुद्दे पर भारत और चीन जैसे देशों की भूमिका पर सवाल उठा चुकी हैं। जुलाई में विधेयक को आगे बढ़ाने वाले द्विदलीय समूह में शहीन भी शामिल थीं। अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूसी ऊर्जा की खरीद से रूस को मिलने वाली आय पर असर डालना यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में अमेरिकी प्रतिबंध नीति का हिस्सा है।
हालांकि, इस कानून का पारित होना अपने आप भारत पर 100% टैरिफ लागू होने के बराबर नहीं है। कानून राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में ऐसा टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। अमेरिकी सीनेट से पारित होने के बाद प्रतिनिधि सभा ने भी इसे मंजूरी दे दी है और अब यह राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की प्रक्रिया में आगे बढ़ता है। इसके बाद वास्तविक टैरिफ लगाए जाएंगे या नहीं और किन देशों पर लागू होंगे, यह अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।
इस घटनाक्रम के बीच भारत-अमेरिका व्यापार और ऊर्जा संबंधों पर भी चर्चा तेज हुई है। भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों और आपूर्ति सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है। ऐसे में अमेरिकी कानून का आगे का कार्यान्वयन भारत के लिए व्यापार और ऊर्जा नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकता है। फिलहाल अमेरिकी कानून में 100% तक टैरिफ की संभावना रखी गई है, जबकि भारत पर वास्तविक प्रभाव अमेरिकी प्रशासन द्वारा आगे उठाए जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगा।