भोपाल में करोड़ों की योजना के बावजूद अधूरे विसर्जन घाट, तैयारियों पर उठे सवाल

भोपाल में गणेश उत्सव के बीच स्थायी विसर्जन घाटों की अधूरी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जुलाई 2025 में करीब 25.08 करोड़ रुपये की योजना के तहत पांच स्थानों पर विसर्जन कुंड और विकास कार्य प्रस्तावित किए गए थे। करीब 14 महीने बाद भी सभी काम पूरे नहीं होने की बात सामने आई है। महापौर मालती राय ने बताया कि कुछ स्थायी घाट तैयार हैं, जबकि अन्य स्थानों पर काम जारी या रुका हुआ है। कांग्रेस ने भी योजना में देरी को लेकर सवाल उठाए हैं।

Sep 18, 2026 - 18:11
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भोपाल में करोड़ों की योजना के बावजूद अधूरे विसर्जन घाट, तैयारियों पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गणेश उत्सव के बीच स्थायी गणेश विसर्जन घाटों की तैयारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। करीब 14 महीने पहले स्थायी विसर्जन व्यवस्था विकसित करने के लिए करोड़ों रुपये की योजना प्रस्तावित किए जाने के बावजूद सभी स्थानों पर काम पूरा नहीं होने की बात सामने आई है। गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का समय नजदीक आने के बीच नगर निगम की ओर से घाटों का निरीक्षण और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।

जानकारी के अनुसार, जुलाई 2025 में भोपाल नगर निगम की ओर से बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, नीलबड़, संजीव नगर, मालीखेड़ी और प्रेमपुरा में विसर्जन कुंड तथा अन्य विकास कार्य कराने की योजना बनाई गई थी। इन पांच स्थानों के लिए कुल करीब 25 करोड़ 8 लाख रुपये से अधिक का प्रावधान बताया गया था। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के लिए 4.45 करोड़ रुपये, नीलबड़ के लिए 6.01 करोड़, संजीव नगर के लिए 4.77 करोड़, मालीखेड़ी के लिए 2.49 करोड़ और प्रेमपुरा के लिए 7.34 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया था।

करीब 14 महीने बीतने के बाद भी प्रस्तावित सभी स्थायी विसर्जन व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार नहीं होने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इस बार भी कई प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए पुराने घाटों और अस्थायी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किए जाने की बात कही जा रही है। नगर निगम की तैयारियों का जायजा लेने के लिए महापौर मालती राय ने संबंधित घाटों का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं की स्थिति की जानकारी ली।

महापौर मालती राय के अनुसार, छोटी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए शहर में करीब 25 से 30 अस्थायी घाट बनाए जाएंगे, जबकि बड़ी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए स्थायी घाटों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मालीखेड़ी का स्थायी घाट तैयार हो चुका है। वहीं नीलबड़ में प्रस्तावित परियोजना का आकार बड़ा होने के कारण उसका काम फिलहाल रुका हुआ है। ऐसे में इस बार विसर्जन व्यवस्था के लिए तैयार स्थायी घाटों के साथ अस्थायी व्यवस्थाओं पर भी निर्भरता रहेगी।

विसर्जन व्यवस्था को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी सामने आई हैं। पर्यावरणविद् सुभाष सी. पाण्डेय ने जलस्रोतों में प्रतिमाओं के सीधे विसर्जन से पानी की गुणवत्ता और जलीय जीवों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने अलग विसर्जन कुंड बनाए जाने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, कुंडों में उचित लाइनिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि विसर्जन के बाद प्रतिमाओं के अवशेषों को बाहर निकालकर उनका उचित निपटारा किया जा सके। उन्होंने प्रतिमाओं में पीओपी तथा रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से बचने की बात भी कही।

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने विसर्जन घाटों की अधूरी व्यवस्था को लेकर नगर निगम और सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की योजना स्वीकृत होने के बावजूद अपेक्षित काम समय पर पूरा नहीं हुआ। कांग्रेस की ओर से योजना में देरी और धन के उपयोग को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की गई है।

गणेश उत्सव के बीच अब नगर निगम के सामने प्रमुख चुनौती सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल विसर्जन व्यवस्था उपलब्ध कराने की है। स्थायी घाटों की योजना के बाकी कार्य कब पूरे होंगे और भविष्य में पुराने घाटों पर निर्भरता कब समाप्त होगी, यह आगे की प्रक्रिया और निर्माण कार्य की प्रगति पर निर्भर करेगा।