नेस्ले के दो फॉर्मूला मिल्क प्रोडक्ट जांच के घेरे में, FSSAI ने दर्ज किए तीन मामले
नेस्ले इंडिया के बेबी फूड से जुड़े कुछ प्रोडक्ट्स को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की जांच में नियमों से संबंधित कमियां सामने आने की बात कही गई है। मामले में NAN EXCELLAPRO Stage 1 और LACTOGEN PRO 1 का उल्लेख किया गया है। FSSAI की कार्रवाई विज्ञापन दावों और एक प्रोडक्ट में बायोटिन की निर्धारित मात्रा से संबंधित बताई गई है। कंपनी के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. नेस्ले इंडिया के बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूला मिल्क प्रोडक्ट्स को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की जांच में नियमों से संबंधित कमियां सामने आने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, नियामक की कार्रवाई कुछ खास प्रोडक्ट्स, उनके विज्ञापन और प्रमोशनल दावों तथा एक प्रोडक्ट में बायोटिन की मात्रा से जुड़ी है। इस मामले में नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
FSSAI की कार्रवाई में जिन प्रोडक्ट्स का उल्लेख किया गया है, उनमें NAN EXCELLAPRO Stage 1 और LACTOGEN PRO 1 शामिल हैं। दोनों प्रोडक्ट छोटे बच्चों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्मूला मिल्क की श्रेणी में आते हैं। इन प्रोडक्ट्स को लेकर नियामक की जांच का मुख्य केंद्र खाद्य सुरक्षा मानकों और लेबलिंग एवं विज्ञापन से जुड़े नियमों का पालन है। हालांकि, सामने आई कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि नेस्ले के सभी बेबी फूड या न्यूट्रिशन प्रोडक्ट असुरक्षित पाए गए हैं। मामला फिलहाल बताए गए विशेष प्रोडक्ट्स और उनसे जुड़े नियमों तक सीमित है।
मामले में एक कार्रवाई प्रोडक्ट के विज्ञापन और प्रमोशनल दावों से संबंधित बताई गई है। बेबी फूड की पैकेजिंग और विज्ञापन में किए जाने वाले दावों के लिए खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत निर्धारित प्रावधान लागू होते हैं। FSSAI की ओर से कंपनी के कुछ प्रमोशनल दावों पर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। नियामक की जांच का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि संबंधित दावे निर्धारित खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग नियमों के अनुरूप थे या नहीं।
दूसरा प्रमुख मामला एक फॉर्मूला मिल्क प्रोडक्ट में बायोटिन की मात्रा से संबंधित है। जानकारी के मुताबिक, FSSAI की जांच में संबंधित प्रोडक्ट में बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानक से कम पाई गई। इसके बाद दोबारा जांच किए जाने पर भी बायोटिन की मात्रा कम पाए जाने की बात सामने आई। बायोटिन शरीर के लिए आवश्यक विटामिनों में शामिल है और पोषण से जुड़े उत्पादों में इसकी निर्धारित मात्रा का पालन करना जरूरी होता है।
मामले में कुल तीन अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें एक प्रकरण विज्ञापन या प्रमोशनल दावों से जुड़ा बताया गया है, जबकि अन्य कार्रवाई प्रोडक्ट की गुणवत्ता और निर्धारित पोषक तत्वों से संबंधित जांच के आधार पर की गई है। खाद्य नियामक द्वारा इस तरह की जांच का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य उत्पादों को निर्धारित सुरक्षा, गुणवत्ता और लेबलिंग मानकों के अनुरूप बनाए रखना है।
बच्चों के लिए फॉर्मूला मिल्क का इस्तेमाल करने वाले माता-पिता के लिए विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, बच्चे की जरूरत और उम्र के अनुरूप फॉर्मूला मिल्क का चयन चिकित्सकीय सलाह से किया जाना चाहिए। किसी एक मामले के आधार पर किसी कंपनी के सभी उत्पादों को असुरक्षित मानना उचित नहीं है। अभिभावकों को प्रोडक्ट की पैकेजिंग, लेबल और नियामकीय जानकारी को ध्यान से पढ़ने के साथ जरूरत पड़ने पर बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
FSSAI की कार्रवाई से एक बार फिर शिशु आहार उत्पादों में गुणवत्ता नियंत्रण, पोषण संबंधी मानकों और विज्ञापन दावों के अनुपालन की अहमियत सामने आई है। संबंधित मामलों में नियामकीय प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।