UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञराज पटेल, छिंदवाड़ा l संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना के लिए मनाया जाने वाला पवित्र हलषष्ठी पर्व बुधवार को रामबाग में श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने पूरे दिन व्रत रखकर हरछठ माता, भगवान बलराम और हल का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। पूजा के दौरान महिलाओं ने अपनी संतानों के सुखद और मंगलमय जीवन के लिए प्रार्थना की। रामबाग में सुबह से ही पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला और पूजा स्थल पर धार्मिक वातावरण बना रहा।
पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचीं महिलाओं ने पूजा स्थल पर आवश्यक सामग्री सजाई और निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजन किया। महिलाओं ने हरछठ माता और भगवान बलराम के साथ कृषि एवं हल से जुड़ी परंपराओं का स्मरण करते हुए पूजा-अर्चना की। पूजन के दौरान सामूहिक रूप से हलषष्ठी की कथा का श्रवण किया गया। इसके बाद आरती कर परिवार की सुख-शांति और संतानों की रक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना की गई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हलषष्ठी पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को समर्पित माना जाता है। भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र हल माना जाता है और इसी वजह से इस पर्व को हलषष्ठी या हलछठ के नाम से जाना जाता है। इस अवसर पर माताएं अपनी संतानों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं।
रामबाग में आयोजित पूजन में क्षेत्रीय परंपराओं के अनुरूप सात प्रकार के अनाज, महुआ, पसई चावल, ज्वार की धानी सहित विभिन्न पारंपरिक पूजन सामग्रियों का उपयोग किया गया। हलषष्ठी पर्व में कृषि परंपराओं का विशेष महत्व माना जाता है। कई स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन हल से जोती गई भूमि से प्राप्त फसल के अन्न का सेवन नहीं किया जाता। इसके स्थान पर परंपरा से जुड़ी विशेष खाद्य सामग्री और अनाज का उपयोग किया जाता है।
पूजन के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से हरछठ माता की कथा सुनी और धार्मिक विधि पूरी करने के बाद आरती की। पूजा स्थल पर पूरे समय श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। महिलाओं ने अपनी संतानों की रक्षा, दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। व्रत और पूजन के माध्यम से महिलाओं ने पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाया।
हलषष्ठी का यह पर्व मां और संतान के बीच स्नेह, ममता और आस्था की गहरी भावना को दर्शाता है। रामबाग में सम्पन्न हुए पूजन में धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों का सुंदर संगम देखने को मिला। पूजन के समापन पर महिलाओं ने भगवान बलराम और हरछठ माता को नमन किया तथा अपने परिवार की खुशहाली और संतानों के लंबे एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। इस दौरान रामबाग का वातावरण श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक संस्कृति से सराबोर रहा।