इस आयोजन में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, हरियाणा की जलशक्ति मंत्री श्रुति चौधरी, राजस्थान के मंत्री सुरेश रावत और उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह सहित कई प्रमुख नेता पहुंचे। भाजपा नेता विनय सहस्त्रबुद्धे को भी रात्रिभोज में शामिल होने के लिए आमंत्रित किए जाने की जानकारी सामने आई है। आयोजन में विभिन्न राज्यों से आए नेताओं की मौजूदगी के कारण इसे संगठन और सरकार के बीच संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पश्चिम बंगाल के मंत्री निशीध प्रमाणिक ने बैठक के बाद बताया कि भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के आवास पर सभी मंत्रियों के लिए रात्रिभोज का निमंत्रण था। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से नेताओं को मार्गदर्शन दिया गया। उनके मुताबिक चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय पानी और जल संसाधनों को लेकर भविष्य की कार्ययोजना रहा। नेताओं को जल को जीवन का मिशन बनाने और जल संसाधनों के महत्व को समझते हुए आगे काम करने का संदेश दिया गया।
बैठक के दौरान जल संसाधनों के संरक्षण, उनके बेहतर प्रबंधन और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार करने पर विचार-विमर्श हुआ। चूंकि विभिन्न राज्यों के जलशक्ति मंत्री पहले से ही जलशक्ति मंत्रालय के विभागीय सम्मेलन के लिए दिल्ली में मौजूद थे, ऐसे में एक ही स्थान पर कई राज्यों के नेताओं की मौजूदगी ने इस रात्रिभोज को संवाद का अवसर भी उपलब्ध कराया।
राजनीतिक नजरिए से भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के आवास पर आयोजित इस रात्रिभोज को ‘डिनर डिप्लोमेसी’ के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि बैठक में सामने रखे गए प्रमुख विषयों में जल संसाधन और भविष्य की कार्ययोजना पर जोर रहा, लेकिन अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक साथ मौजूदगी को संगठनात्मक समन्वय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में ऐसे संवादों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं स्वाभाविक रूप से तेज हो गई हैं।
नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला बड़ा रात्रिभोज आयोजन था, जिसमें विभिन्न राज्यों के प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। बैठक ने जहां जल संसाधनों को लेकर राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और भविष्य की रणनीति पर चर्चा का मंच दिया, वहीं भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य सरकारों के बीच संवाद को भी मजबूत करने का अवसर प्रदान किया। आयोजन के बाद राजनीतिक गलियारों में इसके संगठनात्मक और चुनावी दोनों पहलुओं को लेकर चर्चाएं जारी हैं।