पाकिस्तान में ऐतिहासिक हिंदू मंदिर तोड़े जाने पर भारत सख्त, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले के सिराज गांव में 100 से 125 साल पुराने हिंदू मंदिर को कथित तौर पर तोड़े जाने की घटना पर भारत ने कड़ी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार से तत्काल और पारदर्शी जांच कराने, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और मंदिर को बहाल करने की दिशा में कदम उठाने की मांग की है। भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनकी धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत की रक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।

Sep 3, 2026 - 08:50
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पाकिस्तान में ऐतिहासिक हिंदू मंदिर तोड़े जाने पर भारत सख्त, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को कथित तौर पर तोड़े जाने की घटना को लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। नारोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित इस मंदिर को 100 से 125 साल से भी अधिक पुराना बताया जा रहा है। मंदिर के ध्वस्त किए जाने की खबरों पर भारत के विदेश मंत्रालय ने गंभीर चिंता जताते हुए पाकिस्तान सरकार से मामले की तत्काल और पारदर्शी जांच कराने तथा घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। भारत ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा करना वहां की सरकार की जिम्मेदारी है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत ने नारोवाल जिले के सिराज गांव में ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की परेशान करने वाली खबरों का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के सदियों पुराने पूजा स्थल के खिलाफ इस तरह की तोड़फोड़ बेहद चिंताजनक है। भारत की ओर से यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता और उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। भारत ने मंदिर से जुड़ी घटना को केवल एक स्थानीय मामला मानने के बजाय अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनकी धार्मिक विरासत से जुड़े व्यापक मुद्दे के तौर पर उठाया है।

भारत ने पाकिस्तान के अधिकारियों की कथित लापरवाही पर भी सवाल खड़े किए हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि किसी ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के साथ इस तरह की घटना अल्पसंख्यक समुदाय में असुरक्षा की भावना को बढ़ा सकती है। भारत ने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यह स्पष्ट करे कि मंदिर को किस परिस्थितियों में नुकसान पहुंचाया गया। साथ ही जांच में सामने आने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

भारत ने यह भी जोर दिया कि केवल जांच की घोषणा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोषियों को जवाबदेह ठहराने के साथ-साथ प्रभावित धार्मिक स्थल की सुरक्षा और संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। मंदिर की बहाली की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग भी भारत की ओर से रखी गई है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है।

भारत का कहना है कि पाकिस्तान सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह अपने सभी नागरिकों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों, की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करे। धार्मिक स्थलों की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में भारत ने पाकिस्तान से अपेक्षा जताई है कि वह मंदिर तोड़े जाने की घटना की गंभीरता से जांच कराएगा, दोषियों पर कार्रवाई करेगा और अल्पसंख्यक समुदायों के पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।