भारत-ईरान संबंधों पर अमेरिका की चेतावनी, मार्को रुबियो बोले- प्रतिबंधों से बचाने में मदद की तो होगी कार्रवाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद अमेरिका ने ईरान के साथ आर्थिक गतिविधियों को लेकर चेतावनी दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि कोई भी देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है तो उसे भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

Sep 3, 2026 - 10:39
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भारत-ईरान संबंधों पर अमेरिका की चेतावनी, मार्को रुबियो बोले- प्रतिबंधों से बचाने में मदद की तो होगी कार्रवाई

UNITED NEWS OF ASIA. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद भारत-ईरान संबंधों को लेकर अमेरिका की ओर से कड़ा संदेश सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के साथ आर्थिक गतिविधियों को लेकर भारत समेत अन्य देशों को चेतावनी दी है। रुबियो ने कहा कि कोई भी देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद नहीं कर सकता। यदि कोई देश ऐसी आर्थिक व्यवस्था तैयार करने में मदद करता है, जिससे ईरान को राजस्व हासिल हो और उस धन का इस्तेमाल आतंकवाद के समर्थन या परमाणु हथियारों से जुड़े प्रयासों में किया जाए, तो अमेरिका संबंधित देश पर भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर सकता है।

रुबियो का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन की बिश्केक में हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं की बैठक SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई, जिसमें भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों तथा आपसी हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई। मुलाकात के बाद भारत और ईरान के बीच व्यापारिक सहयोग की संभावनाओं को लेकर भी सवाल उठे। इसी संदर्भ में अमेरिकी विदेश मंत्री से दोनों देशों के बीच किसी संभावित नए व्यापार समझौते के बारे में सवाल किया गया था।

ब्रायन किलमीड शो में दिए गए इंटरव्यू के दौरान रुबियो ने कहा कि उन्हें भारत और ईरान के बीच किसी नए ट्रेड डील की जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अलग-अलग देशों को अपनी विदेश नीति तय करने और ईरान के साथ संबंध बनाए रखने का अधिकार है। इसके बावजूद उन्होंने ईरान के साथ आर्थिक लेनदेन को लेकर अमेरिकी नीति की सीमा स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी देश को ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने का रास्ता उपलब्ध कराने में मदद नहीं करनी चाहिए।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया के कई देश ईरान के संपर्क में हैं और अमेरिका भी पहले ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत तथा संपर्क कर चुका है। उनके मुताबिक, ईरान के साथ संपर्क रखना और किसी आर्थिक गतिविधि में शामिल होना अलग-अलग विषय हैं। अमेरिका की चिंता उन गतिविधियों को लेकर है, जिनके माध्यम से ईरान को ऐसी आर्थिक मदद मिल सकती है जिसे वह अपनी प्राथमिकताओं के लिए इस्तेमाल कर सके।

यह चेतावनी ऐसे समय सामने आई है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाया है। अमेरिका की ओर से उन देशों और कंपनियों को भी सेकेंडरी प्रतिबंधों का सामना करने की चेतावनी दी गई है, जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त को ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट की शुरुआत की थी।

भारत के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली के ईरान के साथ लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऐसे में एक ओर भारत अपने राष्ट्रीय हितों और स्वतंत्र विदेश नीति के तहत विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी प्रतिबंधों और उनके संभावित आर्थिक प्रभावों को भी ध्यान में रखना होगा। फिलहाल रुबियो के बयान को भारत-ईरान संबंधों पर सीधे प्रतिबंध के बजाय ईरान से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को लेकर अमेरिकी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।