कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बलराम की प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन कर की गई। इसके बाद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उन्नत कृषि यंत्रों का पूजन किया। उपस्थित किसानों को भगवान बलराम जयंती की शुभकामनाएं देते हुए उन्नत खेती अपनाने और बेहतर उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र में बदलती तकनीकों और किसानों की आय तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों पर अपने विचार साझा किए।
उपसंचालक कृषि मोरिस नाथ ने किसानों से आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आधुनिक खेती के साथ उन्नशील किसान कम से कम आधा एकड़ भूमि पर रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती का प्रयोग अवश्य करें। उनका कहना था कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से मिट्टी और पर्यावरण के संरक्षण के साथ खेती की टिकाऊ व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
परियोजना संचालक आत्मा धीरज ठाकुर ने भी वर्तमान समय की आवश्यकता के अनुसार रसायन मुक्त खेती को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेतों में उर्वरकों और कृषि रसायनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार ही किया जाए। उन्होंने संतुलित और विवेकपूर्ण कृषि इनपुट के इस्तेमाल को खेती की बेहतर गुणवत्ता और टिकाऊ उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डीसी श्रीवास्तव ने किसानों को जिले में आलू और स्वीट कॉर्न के उत्पादन के साथ-साथ इनके प्रसंस्करण की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कृषि उपज के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से किसानों को अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं और युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं।
किसान संघ के प्रदेश मंत्री मेरसिंग चौधरी ने भगवान बलराम के कृषि और पशुपालन से जुड़े महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान बलराम को कृषि परंपरा से जुड़ा आदर्श बताते हुए कहा कि कृषि और पशुपालन से जुड़े समाज के लिए उनका विशेष महत्व है। किसान संघ के जिला अध्यक्ष राम राव लड़े ने कहा कि भगवान बलराम के परिश्रम और उन्नत कृषि से प्रेरणा लेकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ अपनी कृषि उपज को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
कार्यक्रम में कृषि अभियांत्रिकी की इंजीनियर अश्विनी सिंह, एसडीओ प्रमोद सिंह उट्टी, नीलकंठ पटवारी, प्राची कौतु, दीपक चौरसिया, जनपद सदस्य रोशनी मर्शकोले, सरपंच रामकृष्ण बट्टी, उपसरपंच गजानंद पवार, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एसपी डेहरिया, रमेश पवार, बीटीएम अमित बघेल सहित कृषि विभाग का मैदानी अमला मौजूद रहा। प्रगतिशील किसानों विष्णु पवार, गुरु प्रसाद पवार, जयपाल पवार, रामकृष्ण पवार, गुरुदयाल माहौरे और वीरन यादव सहित बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता की। संगोष्ठी के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक के साथ प्राकृतिक और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ने का संदेश दिया गया।