11 साल तक इलाज के इंतजार के बाद 15 वर्षीय तन्वी की मौत, AIIMS दिल्ली ने गठित की हाईलेवल जांच कमेटी

दिल्ली AIIMS में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित 15 वर्षीय तन्वी की मौत के बाद इलाज में देरी के आरोपों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तन्वी के पिता मुकेश परियानी ने अस्पताल प्रशासन पर वर्षों तक सर्जरी के लिए इंतजार कराने और बार-बार तारीख मिलने का आरोप लगाया है। वहीं AIIMS का कहना है कि तन्वी को VSD और पल्मोनरी एट्रेसिया जैसी जटिल जन्मजात बीमारी थी और 2017 में विशेषज्ञों ने सर्जरी को बेहद जोखिमपूर्ण माना था। अब AIIMS निदेशक ने मामले की विस्तृत जांच के लिए हाईलेवल कमेटी गठित की है।

Sep 3, 2026 - 11:31
Sep 3, 2026 - 11:42
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11 साल तक इलाज के इंतजार के बाद 15 वर्षीय तन्वी की मौत, AIIMS दिल्ली ने गठित की हाईलेवल जांच कमेटी

UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS में 15 वर्षीय तन्वी की मौत के बाद इलाज में कथित देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित तन्वी के परिवार का आरोप है कि बच्ची को हार्ट सर्जरी की जरूरत थी, लेकिन करीब 11 वर्षों तक इलाज के दौरान उन्हें बार-बार इंतजार करना पड़ा। मामले के सामने आने के बाद AIIMS दिल्ली ने अब उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है, जो तन्वी के इलाज से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड, चिकित्सकीय निर्णयों और उपचार की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगी।

तन्वी के पिता मुकेश परियानी के अनुसार वे अपनी बेटी को पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को AIIMS लेकर पहुंचे थे। उनका दावा है कि शुरुआती जांच और इलाज की प्रक्रिया में ही काफी समय बीत गया। पिता के मुताबिक 4 अप्रैल 2014 को डॉक्टरों की सलाह पर ऑपरेशन के लिए पैसे और खून की व्यवस्था भी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद 2015 तक सर्जरी नहीं हो सकी। परिवार का आरोप है कि उन्होंने इस मामले को लेकर PMO में भी शिकायत की, जिसके बाद अस्पताल की ओर से उन्हें बुलाया गया। पिता का दावा है कि उस दौरान शिकायत वापस लेने के बाद ही ऑपरेशन किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

मुकेश परियानी का कहना है कि उन्होंने 2025 और फरवरी 2026 में भी मामले को लेकर शिकायतें कीं, लेकिन उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला। उनका आरोप है कि कभी डॉक्टर के छुट्टी पर होने तो कभी आगे की जांच के नाम पर इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। बेटी की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है। पिता का कहना है कि वह अपनी बेटी के लिए न्याय चाहते हैं और इस संबंध में FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

वहीं AIIMS दिल्ली की ओर से मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर अलग पक्ष सामने आया है। अस्पताल के अनुसार तन्वी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट यानी VSD के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया जैसी जटिल जन्मजात हृदय बीमारी थी। AIIMS का कहना है कि 2017 में विशेषज्ञों के पैनल ने उसकी हृदय संरचना का मूल्यांकन किया था और सर्जरी को अत्यधिक जोखिमपूर्ण माना गया था। इसके बाद परिवार को दवाइयों के माध्यम से उपचार की सलाह दी गई थी। 1 सितंबर 2026 की तड़के तन्वी की तबीयत अचानक बिगड़ी और उपचार के प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

तन्वी की मौत के बाद AIIMS निदेशक ने मामले की विस्तृत जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। कमेटी वर्ष 2012 से 2026 तक के इलाज, OPD विजिट, जांच रिपोर्ट, चिकित्सकीय राय और उपचार संबंधी निर्णयों की समीक्षा करेगी। खास तौर पर 2017 में सर्जरी को जोखिमपूर्ण बताए जाने के निर्णय और इलाज की पूरी समय-सीमा का मूल्यांकन किया जाएगा। जांच से यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि उपचार में किसी स्तर पर देरी हुई थी या मरीज की जटिल चिकित्सकीय स्थिति के कारण सर्जरी संभव नहीं थी। रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।