जेपीसी अध्ययन दौरे में बृजमोहन अग्रवाल ने रखे सुझाव, राजनीति के अपराधीकरण पर रोक को बताया ऐतिहासिक पहल

रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नई दिल्ली में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्ययन दौरे में भाग लेते हुए संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर अपने सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयकों का उद्देश्य राजनीति के अपराधीकरण पर रोक लगाना, सुशासन को मजबूत करना और संवैधानिक नैतिकता को सुदृढ़ करना है।

Jun 18, 2026 - 12:14
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जेपीसी अध्ययन दौरे में बृजमोहन अग्रवाल ने रखे सुझाव, राजनीति के अपराधीकरण पर रोक को बताया ऐतिहासिक पहल

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली l रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 तथा संघ राज्य क्षेत्र (संशोधन) विधेयक 2025 के अध्ययन के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्ययन दौरे में भाग लेते हुए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। दिल्ली सचिवालय में आयोजित बैठकों और विचार-विमर्श कार्यक्रमों में उन्होंने विभिन्न संवैधानिक, प्रशासनिक और विधिक पहलुओं पर अपने विचार रखे।

अध्ययन दौरे के दौरान समिति के सदस्यों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार, गृह मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय तथा विधि कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान प्रस्तावित विधेयकों के संभावित प्रभाव, प्रशासनिक ढांचे, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और सुशासन से जुड़े विषयों पर गहन मंथन किया गया।

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इन विधेयकों का प्रमुख उद्देश्य राजनीति के अपराधीकरण पर रोक लगाना, शासन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और संवैधानिक नैतिकता को मजबूत करना है। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

दिल्ली सचिवालय में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने समिति के सदस्यों का स्वागत किया। बैठक के दौरान दिल्ली सरकार के अधिकारियों और विधि विशेषज्ञों के साथ विधेयकों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली सरकार ने विधेयकों के उद्देश्यों का समर्थन करते हुए कुछ व्यावहारिक सुझाव भी दिए हैं, जिन्हें समिति ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है।

उन्होंने कहा कि समिति द्वारा देशभर के विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शिक्षण संस्थानों, न्यायिक संस्थाओं, बार एसोसिएशनों, नीति विशेषज्ञों और नागरिक समाज संगठनों से सुझाव लिए जा रहे हैं ताकि अंतिम रिपोर्ट व्यापक और संतुलित हो सके।

अग्रवाल ने प्रस्तावित विधेयक के एक महत्वपूर्ण प्रावधान का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री 30 दिनों से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे 31वें दिन पद छोड़ना होगा। उनका कहना था कि यह प्रावधान राजनीति में जवाबदेही और स्वच्छता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित संयुक्त संसदीय समिति अब तक कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर चुकी है। समिति का उद्देश्य सभी हितधारकों की राय लेकर एक समग्र रिपोर्ट तैयार करना है, जिसे आगे विचारार्थ संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

बैठक के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी विचार-विमर्श किया गया। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देशभर से इन विधेयकों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और लोग राजनीति में पारदर्शिता तथा सुशासन की दिशा में हो रहे प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समिति की अंतिम रिपोर्ट लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने तथा सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।