US-ईरान तनाव से उछला कच्चा तेल, 88 डॉलर के करीब पहुंचा क्रूड, वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के कथित हमले, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंता और क्षेत्रीय सुरक्षा जोखिमों के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 88 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जारी रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

Jul 29, 2026 - 13:37
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US-ईरान तनाव से उछला कच्चा तेल, 88 डॉलर के करीब पहुंचा क्रूड, वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता

UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते तनाव का असर वैश्विक कच्चे तेल के बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। हालिया कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 88 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया, जिससे ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के कथित हमले और उसके बाद संभावित जवाबी कार्रवाई की अटकलों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसी वजह से लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में चार प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक घटनाएं तेल की कीमतों को सीधे प्रभावित करती हैं और पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ा देता है।

तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिका और इजराइल के शीर्ष नेतृत्व के बीच भी महत्वपूर्ण बातचीत हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही। दोनों देशों की ओर से संकेत दिए गए कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत के माध्यम से तलाशा जाना चाहिए। हालांकि, क्षेत्र में जारी घटनाक्रम के कारण बाजार फिलहाल सतर्क बना हुआ है।

जुलाई माह के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कभी अमेरिका-ईरान तनाव और लाल सागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के कारण कीमतों में तेजी आई, तो कभी हालात सामान्य होने की उम्मीद से बाजार में गिरावट दर्ज की गई। अब एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से निवेशकों की चिंता लौट आई है और इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य भी इन दिनों वैश्विक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा या सुरक्षा संकट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। बाजार विशेषज्ञ लगातार इस क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

इसी बीच ईरान ने ओमान के उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के नेविगेशन पर संयुक्त नियंत्रण की बात कही गई थी। ईरान ने स्पष्ट किया कि आने वाले जहाजों का मार्ग उसके पूर्ण नियंत्रण में होना चाहिए और बाहर जाने वाले मार्ग पर भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहनी चाहिए। इस रुख ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने का काम किया है।

सऊदी अरब में भी सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी है। वहां के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि देश के पूर्वी हिस्से में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। मंत्रालय के अनुसार, इन ड्रोन को इराक से ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा भेजा गया था। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के संबंध, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति तथा पश्चिम एशिया के सुरक्षा हालात ही कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि तनाव और बढ़ता है या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। वहीं यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं, तो बाजार में कुछ स्थिरता लौटने की संभावना भी बनी रहेगी। फिलहाल वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर पश्चिम एशिया के बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई है।