E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ अरविंद केजरीवाल का विरोध तेज, पीएम आवास मार्च का ऐलान

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ अभियान तेज करते हुए 4 अगस्त को प्रधानमंत्री आवास तक पैदल मार्च करने का ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि E20 पेट्रोल से पुराने वाहनों का माइलेज प्रभावित हो रहा है और रखरखाव की लागत बढ़ रही है। कार्यक्रम में एक मैकेनिक ने भी पुराने वाहनों पर E20 के संभावित प्रभावों को समझाया।

Aug 2, 2026 - 16:17
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E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ अरविंद केजरीवाल का विरोध तेज, पीएम आवास मार्च का ऐलान

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ अपना अभियान तेज करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित "नेशनल टाउन हॉल अगेंस्ट E20" कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से कई वाहनों का माइलेज कम हो रहा है और उनके रखरखाव की लागत बढ़ रही है।

कार्यक्रम के दौरान अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की कि वह 4 अगस्त को दोपहर 12 बजे 100 लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास तक पैदल मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि इस दौरान E20 नीति के विरोध में दो लाख से अधिक हस्ताक्षरों वाली एक याचिका भी प्रधानमंत्री को सौंपने का प्रयास किया जाएगा।

कार्यक्रम में एक मोटर मैकेनिक को भी मंच पर बुलाया गया। मैकेनिक ने कार्बोरेटर और फ्यूल पंप का प्रदर्शन करते हुए बताया कि उनके अनुभव के अनुसार पुराने BS-III और BS-IV वाहनों में E20 ईंधन के उपयोग से कुछ तकनीकी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि लंबे समय तक वाहन खड़े रहने पर कार्बोरेटर में अवशेष जमा होने जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। हालांकि यह प्रस्तुति उनके व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित थी।

अपने अभियान को व्यापक बनाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच "X" पर अपना बायो भी बदला और लोगों से E20 नीति के खिलाफ ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर करने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पहली, उपभोक्ताओं को यह विकल्प दिया जाए कि वे पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल या E20 पेट्रोल में से अपनी पसंद का ईंधन चुन सकें। दूसरी, यदि E20 ईंधन से माइलेज कम होता है तो उसकी कीमत शुद्ध पेट्रोल की तुलना में कम रखी जाए। तीसरी, आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल की कीमत 84 रुपये प्रति लीटर से कम की जाए।

इस बीच, संसद में केंद्र सरकार ने यह स्वीकार किया है कि E20 पेट्रोल के उपयोग से कुछ वाहनों की ईंधन दक्षता (फ्यूल एफिशिएंसी) लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकती है। सरकार ने यह भी कहा है कि वर्ष 2005 से 2016 के बीच निर्मित कुछ BS-III श्रेणी के वाहनों में रबर पाइप, सील और गैस्केट जैसे कुछ पुर्जों पर E20 ईंधन का प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, सरकार का यह भी कहना है कि E20 नीति का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, कच्चे तेल के आयात में कमी लाना और पर्यावरणीय लाभ हासिल करना है।

E20 पेट्रोल को लेकर बहस के बीच वाहन उपयोगकर्ताओं, ऑटोमोबाइल उद्योग और सरकार के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस विषय पर और राजनीतिक तथा तकनीकी चर्चा होने की संभावना है।