भाजपा के ‘दीया जलाने’ के आह्वान पर चोवाराम साहू का तंज, बोले- लोग कैसे जलाएं दिया
कवर्धा कृषि उपज मंडी के पूर्व उपाध्यक्ष चोवाराम साहू ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर घरों में दीया जलाने के भाजपा के आह्वान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बाढ़, महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं का हवाला देते हुए भाजपा से सवाल किया कि इन परिस्थितियों से जूझ रहे परिवार इस अभियान में कैसे शामिल होंगे। साहू ने इस आह्वान को जनता की परेशानियों के बीच असंवेदनशील बताया है।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कवर्धा कृषि उपज मंडी के पूर्व उपाध्यक्ष चोवाराम साहू ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर घरों में दीया जलाने के भाजपा के आह्वान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने देश में बाढ़, महंगाई, बेरोजगारी और किसानों से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि मौजूदा परिस्थितियों से जूझ रहे आम परिवार भाजपा के इस आह्वान के तहत किस तरह दीया जलाएंगे। साहू ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं और ऐसे समय में केवल उत्सव मनाने का आह्वान लोगों की परेशानियों से अलग दिखाई देता है।
साहू के बयान के अनुसार देश के कई राज्यों में बाढ़ की स्थिति से बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हैं। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ प्रभावित गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को अपना घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि जिन परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों की चुनौती है, वे प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीया जलाने की व्यवस्था कैसे करेंगे।
उन्होंने महंगाई और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों का भी मुद्दा उठाया। साहू ने कहा कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार पहले से ही बढ़ती कीमतों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने खाद्य तेल की कीमतों और अन्य घरेलू खर्चों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन परिवारों के लिए रोजमर्रा का खर्च जुटाना चुनौती बना हुआ है, उनके सामने दीया जलाने का सवाल भी आर्थिक स्थिति से जुड़ा है। हालांकि, ये आंकड़े और मूल्य संबंधी दावे साहू के बयान पर आधारित हैं।
चोवाराम साहू ने बेरोजगारी के मुद्दे को भी अपने बयान का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि रोजगार की मांग को लेकर युवा सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। साहू ने सवाल उठाया कि जिन परिवारों के युवा रोजगार की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं, उनके लिए प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर घर में दीया जलाने का आह्वान किस तरह प्रासंगिक है।
अपने बयान में साहू ने मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले का भी उल्लेख किया और आदिवासी बच्चों की मौत से जुड़ा दावा करते हुए पेयजल व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं और प्रभावित परिवारों की परिस्थितियों को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान के आधार पर नहीं होती है, इसलिए इसे साहू के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
साहू ने भाजपा और उसकी सरकार पर विकास एवं निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार को आम लोगों की समस्याओं, रोजगार, महंगाई, बाढ़ प्रभावित परिवारों और किसानों से जुड़े मुद्दों पर प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने भाजपा के दीया जलाने के आह्वान को जनता की परेशानियों के बीच असंवेदनशील बताया।
चोवाराम साहू इससे पहले भी कवर्धा और छत्तीसगढ़ से जुड़े विभिन्न राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। फरवरी 2026 में भी उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार के बजट को लेकर बेरोजगार युवाओं और प्रदेशवासियों की समस्याओं का मुद्दा उठाया था।
भाजपा की ओर से इस विशेष बयान पर कोई प्रतिक्रिया इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है। इसलिए दीया जलाने के आह्वान और उससे जुड़े राजनीतिक मतभेदों को संबंधित पक्षों के बयानों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। साहू ने अपने बयान के अंत में भाजपा से सवाल किया कि देश के सामने मौजूद आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच आम लोगों को दीया जलाने के लिए प्रेरित करने से पहले उनकी समस्याओं का समाधान करने पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है।