UPI MDR पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला, कहा- चार्ज वापस लिया जाए; केंद्र ने कहा- ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा शुल्क

UPI के चुनिंदा मर्चेंट लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के फैसले को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। राहुल गांधी ने सरकार से प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के दबाव में निर्णय लेने का आरोप लगाया। वहीं केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR टैक्स नहीं है और इसे ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा। यह शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के निर्धारित P2M लेन-देन पर लागू होगा।

Sep 16, 2026 - 16:39
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UPI MDR पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला, कहा- चार्ज वापस लिया जाए; केंद्र ने कहा- ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा शुल्क

UNITED NEWS OF ASIA. UPI के चुनिंदा मर्चेंट लेन-देन पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले का विरोध करते हुए सरकार से UPI पर प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के दबाव में झुकने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी पर राजनीतिक टिप्पणी की।

राहुल गांधी का आरोप है कि UPI पर शुल्क लगाने का फैसला देश के डिजिटल भुगतान ढांचे को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार अमेरिका को फायदा पहुंचाने वाली नीतियां अपना रही है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार पर सवाल उठा रही है और नए MDR प्रावधान को वापस लेने की मांग कर रही है। हालांकि, अमेरिका से संबंधित राहुल गांधी के आरोप राजनीतिक दावे हैं और सरकार ने इस फैसले को UPI इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़ते हुए अलग कारण बताए हैं।

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के निर्धारित Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन के लिए MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर लगाया जाने वाला शुल्क है, जिसे बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप से जुड़े प्रतिभागियों के बीच साझा किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन किसी भी राशि के लिए मुफ्त रहेंगे। इसी तरह ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और शून्य-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के लेन-देन पर भी शुल्क नहीं लगेगा। सरकार के मुताबिक नए ढांचे के बावजूद करीब 96 प्रतिशत P2M UPI लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे।

छोटे व्यापारियों के लिए भी अलग प्रावधान रखा गया है। UPI QR के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडर्स को शून्य MDR का लाभ मिलता रहेगा। सरकार का कहना है कि इससे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत का असर नहीं पड़ेगा।

कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। ₹2,000 से अधिक के निर्धारित लेन-देन में रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसी श्रेणियों पर फ्लैट ₹5 MDR का प्रावधान किया गया है। वहीं पूंजी बाजार से जुड़े कुछ UPI भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR और ₹300 की अधिकतम सीमा लागू होगी।

इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि कांग्रेस इसे राजनीतिक रूप से “UPI टैक्स” के रूप में पेश कर रही है, जबकि केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि MDR न तो सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स है और न ही NPCI का कर। सरकार के अनुसार इससे मिलने वाला शुल्क UPI के संचालन, भुगतान बुनियादी ढांचे और संबंधित सेवाओं को बनाए रखने के लिए पेमेंट इकोसिस्टम के प्रतिभागियों में वितरित होगा।

इस तरह 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए नियम को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। राहुल गांधी और कांग्रेस इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार इसे UPI व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़कर देख रही है। फिलहाल P2P भुगतान और पात्र छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-MDR व्यवस्था जारी रहने की सरकारी पुष्टि है।