सरपंचों के अनुसार, ग्राम पंचायतों पर वर्ष 2016 से बिजली बिल की राशि बकाया बताई जा रही है। अलग-अलग पंचायतों में यह बकाया राशि करीब 12 लाख रुपये से लेकर 55 लाख रुपये तक होने का दावा किया गया है। सरपंचों का कहना है कि पूर्व में शासन स्तर से ऐसी व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए गए थे, जिसके तहत पंचायतों के मद से राशि काटकर बिजली बिल का भुगतान सीधे किए जाने की बात थी। इसी व्यवस्था के चलते पंचायतों द्वारा संबंधित बिजली बिल का नियमित भुगतान नहीं किया गया।
इस पूरे मामले को लेकर 2016 के शासनादेश का भी हवाला दिया जा रहा है। हालिया स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 13 मई 2016 को ग्राम पंचायत स्तर पर स्ट्रीट लाइट और अन्य विद्युत देयकों के भुगतान को लेकर निर्देश जारी किए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि दोहरे भुगतान की स्थिति से बचने के लिए ग्राम पंचायतों को आगामी आदेश तक स्ट्रीट लाइट के विद्युत देयकों का भुगतान नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। अब पुराने बकाये को लेकर कनेक्शन काटे जाने से पंचायत प्रतिनिधि वर्तमान भुगतान व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
सरपंचों का कहना है कि पंचायत भवनों के बिजली बिल का भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा है, लेकिन पेयजल और स्ट्रीट लाइट से जुड़े बकाया बिल को लेकर अलग स्थिति है। उनका दावा है कि अचानक बिजली कनेक्शन काटे जाने से गांवों में पेयजल सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में भी परेशानी की स्थिति बन रही है। सरपंचों ने कलेक्टर से मांग की है कि बिजली विभाग और पंचायतों के बीच बकाया राशि तथा भुगतान व्यवस्था को लेकर स्पष्ट समाधान निकाला जाए।
इससे पहले पाटन ब्लॉक के सरपंचों ने बिजली बिल के मुद्दे पर बैठक कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, पाटन जनपद क्षेत्र के 108 सरपंचों ने इस मुद्दे पर चर्चा की थी। सरपंचों ने कहा था कि बिजली कनेक्शन काटे जाने से पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी जरूरी व्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। उन्होंने समस्या का जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी।
ज्ञापन में प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी शिकायत भी उठाई गई। सरपंचों का कहना है कि ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद भी कुछ हितग्राहियों के नाम नई सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं। उन्होंने ग्राम सभा में तय किए गए प्रस्ताव और पात्र हितग्राहियों के आधार पर सूची में नाम शामिल करने की मांग की है। पाटन के सरपंचों की बैठक में भी प्रधानमंत्री आवास योजना की प्राथमिकता सूची को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी।
सरपंच संघ ने कलेक्टर से दोनों प्रमुख समस्याओं पर प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है। बिजली बिल के पुराने बकाये और वर्ष 2016 के शासनादेश के बीच वर्तमान भुगतान व्यवस्था को स्पष्ट करने के साथ ही पंचायतों की पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए समाधान की मांग की गई है। अब प्रशासन और संबंधित बिजली विभाग की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पंचायतों के लंबित बिजली बिल का भुगतान किस व्यवस्था के तहत किया जाएगा।