OTT के ‘सांस्कृतिक प्रदूषण’ पर RSS ने बनाया अनौपचारिक पैनल, सरकार को रेगुलेशन पर सुझाव देने की तैयारी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने OTT प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट को लेकर सुझाव तैयार करने के लिए एक अनौपचारिक समूह बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, समूह में शिक्षा और संस्कृति क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ पूर्व कुलपति और संघ के प्रचारक शामिल हैं। पैनल OTT कंटेंट की निगरानी और नियमन से जुड़े सुझाव तैयार कर केंद्र सरकार के संबंधित विभागों को सौंप सकता है।

Sep 16, 2026 - 15:22
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OTT के ‘सांस्कृतिक प्रदूषण’ पर RSS ने बनाया अनौपचारिक पैनल, सरकार को रेगुलेशन पर सुझाव देने की तैयारी

UNITED NEWS OF ASIA. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने ओवर-द-टॉप यानी OTT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट को लेकर एक अनौपचारिक समूह का गठन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह समूह OTT प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले ऐसे कंटेंट को लेकर सुझाव तैयार करेगा, जिसे संघ से जुड़े सूत्र “सांस्कृतिक प्रदूषण” के रूप में देखते हैं। समूह की ओर से तैयार प्रस्ताव को आगे केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और केंद्र सरकार के अन्य संबंधित पक्षों के सामने रखने की बात कही गई है। इस पहल का उद्देश्य OTT कंटेंट के नियमन से जुड़े संभावित उपायों पर विचार करना बताया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह पैनल कुछ महीने पहले बनाया गया था और इसकी पहली बैठक अगस्त 2026 में हुई। समूह को लेकर RSS से जुड़े सूत्रों ने इसे अनौपचारिक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े लोगों के अलावा पूर्व कुलपति और संघ के प्रचारक भी शामिल हैं। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में पैनल के सभी सदस्यों के नाम सार्वजनिक तौर पर नहीं बताए गए हैं। इसलिए इस समूह में शामिल व्यक्तियों की पूरी सूची की पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।

RSS से जुड़े सूत्रों के अनुसार, समूह OTT प्लेटफॉर्म के लिए किसी प्रकार की निगरानी या नियमन व्यवस्था की आवश्यकता पर विचार कर रहा है। चर्चा में सिनेमाघरों में प्रदर्शित फिल्मों के लिए मौजूद प्रमाणन व्यवस्था जैसी किसी प्रणाली की संभावना भी शामिल है। समूह का प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे केंद्र सरकार के संबंधित विभागों के समक्ष रखा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव तैयार करने से पहले कानून के क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ भी व्यापक विचार-विमर्श किए जाने की आवश्यकता बताई गई है। अभी समूह के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है।

OTT कंटेंट को लेकर RSS प्रमुख मोहन भागवत पहले भी चिंता जाहिर कर चुके हैं। 12 अक्टूबर 2024 को नागपुर में विजयादशमी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ कंटेंट को लेकर आपत्ति जताई थी और डिजिटल सामग्री के नियमन के लिए कानूनी व्यवस्था की जरूरत की बात कही थी। अब करीब दो वर्ष बाद RSS के स्तर पर OTT कंटेंट को लेकर सुझाव तैयार करने के लिए समूह का गठन किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल के पीछे संघ की ‘कुटुंब प्रबोधन’ गतिविधि से मिले फीडबैक को भी एक कारण बताया जा रहा है। कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से परिवार, पीढ़ियों के बीच संबंध और सामाजिक मूल्यों से जुड़े विषयों पर काम किया जाता है। RSS से जुड़े सूत्रों का कहना है कि OTT पर उपलब्ध कुछ सामग्री के प्रभाव को लेकर इस गतिविधि से जुड़े स्तरों पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है।

वर्तमान में OTT और अन्य डिजिटल मीडिया के लिए सिनेमाघरों में प्रदर्शित फिल्मों जैसा पूर्व-प्रमाणन करने वाला अलग सेंसर बोर्ड नहीं है। केंद्र सरकार ने 2021 के सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत डिजिटल समाचार और OTT प्लेटफॉर्म के लिए आचार संहिता तथा तीन-स्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था निर्धारित की है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इस व्यवस्था में प्रकाशक स्तर, स्व-नियामक निकाय और केंद्र सरकार की निगरानी व्यवस्था शामिल है।

OTT कंटेंट पर सरकारी कार्रवाई का मामला भी पहले सामने आ चुका है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आपत्तिजनक या कथित तौर पर कानून का उल्लंघन करने वाले कंटेंट से जुड़े कई OTT प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई की है। ऐसे में RSS के नए अनौपचारिक समूह की ओर से तैयार होने वाला प्रस्ताव डिजिटल कंटेंट के नियमन पर चल रही व्यापक बहस में एक और सुझाव के रूप में सामने आ सकता है।