प्रदर्शनकारियों और आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को उनके अधिकारों के अनुरूप मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है। ग्रामीणों की ओर से ग्रामसभा की प्रक्रिया, जमीन के आकलन और मुआवजा निर्धारण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में पानी बढ़ने के साथ उनकी समस्याएं और गंभीर हो रही हैं तथा प्रशासन को उनकी मांगों का स्थायी समाधान करना चाहिए।
इस आंदोलन के दौरान ग्रामीण प्रतीकात्मक रूप से लकड़ी के ढांचों पर बैठकर या लेटकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। इसे ‘चिता आंदोलन’ नाम दिया गया है। प्रदर्शनकारी इसे विस्थापन और पुनर्वास से जुड़ी अपनी चिंताओं को सामने रखने का माध्यम बता रहे हैं। इससे पहले भी पन्ना में केन-बेतवा, मझगाय और रुंझ परियोजनाओं से प्रभावित लोगों ने दस्तावेज उपलब्ध कराने, समस्याओं का समाधान करने और पुनर्वास से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन किया है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास को लेकर अलग स्थिति प्रस्तुत की है। जल शक्ति मंत्रालय ने अगस्त 2026 में कहा था कि बिना मुआवजे के प्रभावित परिवारों को विस्थापित किए जाने संबंधी आरोप सही नहीं हैं। मंत्रालय के अनुसार अधिकांश पात्र परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास लाभ दिए जा चुके हैं तथा कुछ मामलों में प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं बाकी हैं। सरकार ने यह भी कहा कि भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया संबंधित कानूनों तथा मध्य प्रदेश सरकार के विशेष पुनर्वास पैकेज के अनुसार की जा रही है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2026 तक पन्ना में परियोजना से प्रभावित सात और एक डीसॉलिट गांव के कुल 1321 परिवारों के लिए पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन मद में 165.12 करोड़ रुपये का प्रावधान दर्ज था। इनमें 1319 परिवारों को 164.87 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था। प्राधिकरण के आंकड़ों में पन्ना के लिए भुगतान की प्रगति 99.84 प्रतिशत दर्ज की गई है।
हालांकि, मौजूदा आंदोलन यह संकेत देता है कि सरकारी आंकड़ों और प्रभावित ग्रामीणों के अनुभवों के बीच अभी भी असहमति बनी हुई है। इसी वजह से मुआवजा, पुनर्वास और परियोजना से प्रभावित परिवारों की शिकायतों का समाधान प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। केन-बेतवा परियोजना केंद्र सरकार की प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य बुंदेलखंड में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार परियोजना से 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और करीब 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
अजयगढ़ में जारी आंदोलन के बीच अब प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों की शिकायतों को सुनने, उपलब्ध आंकड़ों और जमीनी दावों के बीच अंतर को स्पष्ट करने तथा पुनर्वास प्रक्रिया से जुड़े लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से सुलझाने की चुनौती है। वहीं ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं।