रूस से तेल खरीद पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, अमेरिकी हाउस में बिल आगे बढ़ा; अंतिम वोट पर नजर
रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की शक्ति देने वाला अमेरिकी विधेयक हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आगे बढ़ गया है। भारत इस प्रस्ताव से प्रभावित होने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। हाउस में 214-211 के प्रक्रियात्मक वोट के बाद अंतिम मतदान की तैयारी है। भारत सरकार मामले पर नजर बनाए हुए है और विदेश मंत्रालय ने ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले राष्ट्रीय हितों के आधार पर लेने की बात कही है।
UNITED NEWS OF ASIA. रूस से तेल और गैस खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक तनाव का एक नया मुद्दा सामने आया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ऐसे विधेयक को आगे बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है। भारत और चीन इस प्रस्ताव से प्रभावित होने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। हालांकि, विधेयक के आगे बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। अंतिम निर्णय और इसके संभावित इस्तेमाल की प्रक्रिया अभी बाकी है।
यह विधेयक ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ के नाम से आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी सीनेट इसे अगस्त में 86-11 के वोट से पारित कर चुकी है। सीनेट से पारित संस्करण में रूस के पांच सबसे बड़े तेल और गैस खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की शक्ति देने का प्रावधान है, जबकि खरीदार देशों के नाम सीधे सूचीबद्ध नहीं किए गए थे। अमेरिकी हाउस में इस प्रावधान को लेकर अलग-अलग संशोधनों पर भी चर्चा हुई है।
15 सितंबर को अमेरिकी हाउस में बिल को आगे बढ़ाने से जुड़े प्रक्रियात्मक प्रस्ताव को 214-211 मतों से मंजूरी मिली। इसके बाद विधेयक पर अंतिम मतदान का रास्ता खुल गया। एक संशोधन में भारत और चीन सहित कई देशों के नाम सीधे जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया था। भारतीय नाम को लेकर यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संभावित टैरिफ कार्रवाई के दायरे को लेकर स्पष्टता बढ़ सकती है। हालांकि, अंतिम कानून में कौन-सा प्रावधान रहेगा और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा, यह अमेरिकी विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
भारत की ओर से इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पहले प्रस्तावित अमेरिकी कानून को लेकर कहा था कि भारत घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। भारत की ऊर्जा नीति में रूस से होने वाला तेल आयात एक महत्वपूर्ण विषय है और सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा तथा भारतीय उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले लेने की बात कही है। इसलिए अमेरिकी विधेयक के आगे बढ़ने के बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत पर निश्चित रूप से 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा।
अमेरिकी प्रस्ताव का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसकी ऊर्जा आय को प्रभावित करना बताया गया है। विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के अलावा उन जहाजों और नेटवर्क पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि रूसी ऊर्जा की खरीद से मॉस्को को आर्थिक संसाधन मिलते हैं, जबकि विरोध करने वाले अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार देने को लेकर चिंता जताई है।
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस लंबे समय से उसकी ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। यदि भविष्य में अमेरिकी प्रशासन प्रस्तावित अधिकार का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिकी हाउस में विधेयक के अंतिम मतदान और उसके बाद की प्रक्रिया पर नजर है। कानून बनने के बाद भी भारत पर टैरिफ स्वतः लागू नहीं होगा, बल्कि प्रस्तावित अधिकार के इस्तेमाल का अलग निर्णय आवश्यक होगा।