नागरतेन्दु और लोटान गांव पहाड़ी क्षेत्र में स्थित हैं। यहां रहने वाले ग्रामीणों के लिए नीचे स्थित बाजार और अन्य सुविधाओं तक पहुंचना भी आसान नहीं है। ऐसे में सरकारी राशन लेने के लिए पहाड़ी रास्ते से करीब 2 किलोमीटर उतरकर दुकान तक पहुंचना उनके लिए अतिरिक्त मेहनत और समय का कारण बनता है। ग्रामीणों का कहना है कि कठिन रास्ता तय करने के बाद जब राशन नहीं मिलता तो उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, कई परिवार पिछले कई दिनों से राशन दुकान तक पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि दुकान पर पहुंचने के बाद उन्हें तत्काल राशन उपलब्ध कराने के बजाय बाद में आने के लिए कहा जाता है। इसके चलते उन्हें दोबारा पहाड़ से नीचे उतरकर दुकान तक आना पड़ रहा है। लगातार चक्कर लगाने के बावजूद राशन नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था ग्रामीण परिवारों के लिए विशेष महत्व रखती है। ऐसे क्षेत्रों में राशन दुकान तक पहुंचने में ही काफी समय और श्रम लगता है। इसलिए यदि निर्धारित समय पर राशन उपलब्ध नहीं होता है तो इसका सीधा असर ग्रामीणों की दैनिक जरूरतों पर पड़ सकता है। भारत सरकार के ई-पीडीएस पोर्टल पर भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन आवंटन, उचित मूल्य दुकानों और वितरण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में राशन व्यवस्था को लेकर हाल के दिनों में अन्य शिकायतें और अनियमितताओं के मामले भी सामने आए हैं। सितंबर में क्षेत्र की दो उचित मूल्य दुकानों की जांच में खाद्यान्न की कमी का मामला सामने आने और पुलिस कार्रवाई की खबरें भी प्रकाशित हुई हैं। हालांकि, नागरतेन्दु और लोटान गांव के ग्रामीणों द्वारा बताई गई मौजूदा परेशानी के कारणों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें उनके हिस्से का राशन समय पर उपलब्ध कराया जाए और उन्हें बार-बार पहाड़ी रास्ता तय कर दुकान के चक्कर न लगाने पड़ें। खासतौर पर दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों के लिए राशन वितरण की नियमितता और व्यवस्था की निगरानी महत्वपूर्ण है। अब ग्रामीणों को इंतजार है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और पात्र हितग्राहियों को समय पर राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करे।