महासमुंद में महिला सशक्तिकरण से स्वावलंबन कार्यक्रम आयोजित, आत्मनिर्भरता और नशामुक्ति का दिया गया संदेश
महासमुंद जिले के खट्टीडीह कापा में महिला सशक्तिकरण से स्वावलंबन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समाजसेविका डॉ. एकता लंगेह ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। कार्यक्रम में स्व-सहायता समूह की महिलाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों का सम्मान किया गया। साथ ही शासकीय योजनाओं की जानकारी, नशामुक्ति की शपथ और पौधरोपण का आयोजन भी हुआ।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l जिले के खट्टीडीह कापा में महिला सशक्तिकरण से स्वावलंबन कार्यक्रम का आयोजन उत्साह और गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना, उन्हें शासकीय योजनाओं की जानकारी देना तथा समाज में उनकी भागीदारी को और अधिक मजबूत बनाना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मितानिनें तथा ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजसेविका डॉ. एकता लंगेह ने कहा कि किसी भी समाज का समग्र विकास महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। आज महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, उद्योग, कृषि, व्यापार और सामाजिक सेवा जैसे हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर महिला न केवल अपने परिवार को सशक्त बनाती है, बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार, लघु उद्योग, कृषि आधारित गतिविधियों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बनें। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और समाज में सम्मानजनक पहचान का आधार भी है।
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आजीविका से जुड़ी योजनाओं का लाभ लेकर वे अपने जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। विशेषज्ञों ने योजनाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और मिलने वाले लाभों के बारे में भी विस्तार से जानकारी साझा की।
इस अवसर पर क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह के दौरान उनके समाज और ग्रामीण विकास में योगदान की सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि ये महिलाएं गांव-गांव में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और महिला जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
कार्यक्रम के दौरान महिला स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। महिलाओं को परिवार और समाज में उनकी जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने अधिकारों के प्रति भी जागरूक रहने का संदेश दिया गया। उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए सामूहिक प्रयासों और समूह आधारित गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।
आयोजन के अंत में उपस्थित सभी महिलाओं और ग्रामीणों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगे तथा अपने परिवार और समाज को भी नशामुक्त बनाने के लिए लोगों को जागरूक करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि नशामुक्त समाज ही स्वस्थ और समृद्ध समाज की नींव है तथा इसके लिए जनभागीदारी आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कार्यक्रम के समापन पर पौधरोपण भी किया गया। प्रतिभागियों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया। बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है तथा इसमें प्रत्येक नागरिक की सहभागिता महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम का समापन महिला सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्त समाज के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के कार्यक्रम महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ग्रामीण महिलाओं ने भी इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया।