महासमुंद में कांग्रेस ने मनाई लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को किया याद
महासमुंद के कांग्रेस भवन में शहर कांग्रेस कमेटी ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई। कार्यकर्ताओं ने तिलक के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके राष्ट्रवादी विचारों, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और समाज जागरण के कार्यों को याद किया। वक्ताओं ने तिलक के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l शहर कांग्रेस कमेटी महासमुंद द्वारा स्थानीय कांग्रेस भवन में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा' का ऐतिहासिक उद्घोष देने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके राष्ट्रवादी विचारों और संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम की शुरुआत तिलक के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद उपस्थित वक्ताओं ने उनके जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा देने के साथ-साथ देशवासियों में स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत की। उनके विचार आज भी देश के युवाओं और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ. रश्मि चंद्राकर ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे महान नेता थे जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनजागरण का व्यापक अभियान चलाया। उन्होंने अपने लेखन, पत्रकारिता और सामाजिक आंदोलनों के माध्यम से लोगों में स्वतंत्रता की चेतना पैदा की। उन्होंने कहा कि तिलक केवल राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे समाज सुधारक, शिक्षाविद और दूरदर्शी चिंतक भी थे। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है।
डॉ. रश्मि चंद्राकर ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को लोकमान्य तिलक के आदर्शों और विचारों से सीख लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि तिलक के राष्ट्रवादी विचारों, उनके त्याग और बलिदान की गाथा को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम के दौरान मंडल अध्यक्ष खिलावन बघेल ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस दौर में जब अंग्रेजों का दमन चरम पर था, तब तिलक ने जनता के भीतर राष्ट्रवाद की भावना जागृत करने के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों को एक प्रभावी माध्यम बनाया। उन्होंने सार्वजनिक गणेशोत्सव और शिवाजी उत्सव की शुरुआत कर समाज को एकजुट किया तथा लोगों में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया।
उन्होंने कहा कि तिलक का मानना था कि जब तक समाज संगठित नहीं होगा, तब तक स्वतंत्रता का लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा। उनके नेतृत्व और विचारों ने देशभर के युवाओं में स्वतंत्रता के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया। उनका प्रसिद्ध उद्घोष "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" आज भी देशवासियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने यह भी कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना। उन्होंने भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था की वकालत की। साथ ही पत्रकारिता के माध्यम से अंग्रेजी शासन की नीतियों का खुलकर विरोध किया और जनता की आवाज को मजबूती प्रदान की। उनके समाचार पत्रों ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोकमान्य तिलक के बताए मार्ग पर चलने तथा देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में भी तिलक के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में थे। उनके आदर्श समाज को राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और जनसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में जिला कोषाध्यक्ष सेवनलाल चंद्राकर, जिला प्रभारी महामंत्री लक्ष्मण पटेल, शहर महामंत्री निर्मल जैन, भरत ठाकुर, सोनम रामटेके, हीरा बंजारे, हुलास गिरि गोस्वामी, अमन चंद्राकर, राशी महिलांग, अमर चंद्राकर, वीरेंद्र चंद्राकर, प्रदीप चंद्राकर, अनीश राजवानी, मेहुल सूचक, गोपी तारक, मनोहर ठाकुर, प्रकाश अजमानी, कपिल साहू, अनुराग चंद्राकर, खेमराज ध्रुव, सन्नी महानंद, राजेश मुकर्जी, राहुल लालवानी, लीलू साहू, बसंत चंद्राकर, गंगा बाग, भानु सोनी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के व्यक्तित्व और कृतित्व को नमन करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए समाज और देश की सेवा करने का संकल्प लिया। श्रद्धांजलि सभा का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। आयोजन के दौरान पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति और सम्मान का भाव देखने को मिला। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश की आजादी में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों से प्रेरणा मिलती रहेगी।