पेंशन दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप, कोरबा में पंच पर जांच शुरू
कोरबा जिले के रजगामार गांव में एक परित्यक्ता महिला से पेंशन दिलाने के नाम पर 9 हजार रुपये लेने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं और तीन सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l कोरबा जिले में मुख्यमंत्री पेंशन योजना के तहत पेंशन दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत रजगामार की एक परित्यक्ता महिला ने पंचायत प्रतिनिधि पर आरोप लगाया है कि उससे रुका हुआ पेंशन जारी कराने के नाम पर 9 हजार रुपये लिए गए। शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मामला कोरबा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत रजगामार का है। यहां रहने वाली गायत्री प्रजापति मुख्यमंत्री पेंशन योजना की हितग्राही हैं। बताया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों से उनका पेंशन बंद था, जिसके कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इसी दौरान वार्ड क्रमांक 5 के पंच जितेंद्र राठौर ने उनसे संपर्क कर कहा कि वह उनका रुका हुआ पेंशन शुरू करवा सकते हैं।
पीड़िता का आरोप है कि पेंशन शुरू कराने के एवज में उनसे 9 हजार रुपये की मांग की गई। कुछ समय बाद उनका करीब 14 हजार रुपये का रुका हुआ पेंशन जारी हो गया। पेंशन राशि खाते में आने के बाद पंच द्वारा तय रकम मांगी गई। पीड़िता ने 8 हजार रुपये देने की बात कही, लेकिन आरोप है कि अधिकारियों को पैसा देने का हवाला देकर पूरे 9 हजार रुपये लिए गए।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह राशि ग्राम पंचायत रजगामार के सरपंच हरिसिंह राठिया के बेटे चंद्रभान राठिया के माध्यम से ली गई। मामले से परेशान होकर पीड़िता ने इसकी शिकायत कलेक्टर से की और कार्रवाई की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोरबा को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद जिला पंचायत के उपसंचालक पंचायत द्वारा 13 मई 2026 को तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई। टीम को तीन दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच टीम में जनपद पंचायत कोरबा की सहायक लेखा अधिकारी जयश्री अग्रवाल, विकास विस्तार अधिकारी ज्योति राज तथा सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण सह करारोपण अधिकारी चतुरानंद सिंह कंवर को शामिल किया गया है। टीम पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाएगी कि पेंशन जारी कराने के नाम पर वास्तव में रिश्वत ली गई या नहीं।
इस मामले के सामने आने के बाद पंचायत व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। राज्य सरकार जहां सुशासन शिविरों और योजनाओं के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के आरोप प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहे हैं।
अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। लोगों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और पीड़िता को न्याय मिल पाता है या नहीं।