दिल्ली हाईकोर्ट ने CJP लाठीचार्ज मामले में दिल्ली पुलिस को भेजा नोटिस, चार हफ्ते में मांगा जवाब

सीजेपी प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत ने बॉडी कैमरा और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया, जबकि केंद्र सरकार ने याचिका को पब्लिसिटी स्टंट बताया।

Jul 22, 2026 - 17:24
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दिल्ली हाईकोर्ट ने CJP लाठीचार्ज मामले में दिल्ली पुलिस को भेजा नोटिस, चार हफ्ते में मांगा जवाब

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली में सीजेपी (CJP) के संसद मार्च के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने घटना से जुड़े बॉडी कैमरा फुटेज और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने के आदेश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।

मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और 18 जुलाई को जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाए जाने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के लाठीचार्ज किया गया और कई छात्र-छात्राएं घायल हुए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत में कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने अचानक बल प्रयोग किया। उन्होंने दावा किया कि कई छात्राओं के साथ अभद्रता और छेड़छाड़ की घटनाएं हुईं तथा 90 से अधिक छात्र घायल हुए। याचिका में जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, स्वतंत्र जांच कराने और कथित अत्यधिक बल प्रयोग की जांच की मांग की गई।

अधिवक्ता ने अदालत में यह भी कहा कि घटना से जुड़े वीडियो में पुलिसकर्मियों की पहचान की जा सकती है और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई संभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर जिन लाठियों का इस्तेमाल किया गया, उनमें कीलें लगी थीं, जिसकी भी जांच होनी चाहिए।

वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में कहा कि सीजेपी का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं था और प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाएं हुईं। सरकार ने अदालत को बताया कि दायर की गई याचिकाएं केवल प्रचार हासिल करने के उद्देश्य से दाखिल की गई हैं। सरकार का यह भी कहना था कि जिन लोगों के साथ कथित मारपीट का दावा किया जा रहा है, उनमें से किसी ने अब तक पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं कराई और न ही व्यक्तिगत रूप से अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में दिल्ली पुलिस से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के लिए सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, विशेष रूप से बॉडी कैमरा और सीसीटीवी फुटेज, सुरक्षित रखे जाएं ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनका परीक्षण किया जा सके।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। इस दौरान अदालत दिल्ली पुलिस के जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।