नगरी वनांचल में फसलों की स्थिति दयनीय, किसान चिंतित, राजस्व जांच कर फसल मुआवजा देने की मांग

नगरी वनांचल क्षेत्र में बारिश की अनियमितता के कारण खरीफ फसलों की स्थिति खराब होने का दावा किया गया है। आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनोज साक्षी ने शासन-प्रशासन से खेतों का राजस्व निरीक्षण कर फसल नुकसान का आकलन कराने, प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और वनांचल क्षेत्र को सूखा घोषित करने की मांग की है।

Sep 7, 2026 - 10:14
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नगरी वनांचल में फसलों की स्थिति दयनीय, किसान चिंतित, राजस्व जांच कर फसल मुआवजा देने की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l नगरी वनांचल क्षेत्र में खरीफ फसलों की स्थिति खराब होने को लेकर किसान चिंतित हैं। बारिश के असमान वितरण के कारण खेतों में फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। खरीफ फसल की शुरुआत में अधिक बारिश के चलते कई स्थानों पर पानी खेतों से निकल गया, जबकि अब बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की कमी की स्थिति बन गई है। इससे वनांचल क्षेत्र में खेती पर निर्भर किसानों के सामने फसल खराब होने का संकट खड़ा हो गया है।

आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनोज साक्षी ने वनांचल क्षेत्र के किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए शासन-प्रशासन से प्रभावित खेतों का राजस्व जांच और निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि किसान कर्ज लेकर खेती-किसानी करते हैं और पूरी तरह खरीफ फसल की उपज पर निर्भर रहते हैं। यदि फसल खराब होती है तो किसानों के सामने आर्थिक संकट के साथ कर्ज चुकाने की चिंता भी बढ़ जाती है। ऐसे में शासन को समय रहते प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की स्थिति का आकलन कर किसानों को राहत उपलब्ध करानी चाहिए।

मनोज साक्षी के अनुसार नगरी वनांचल के बोरई, रिसगांव, खल्लारी, कसपुर, एकावरी, बहीगांव, फरसगांव और ठोठाझरिया सहित कई गांवों में सिंचाई की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है। इन क्षेत्रों के किसान मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर रहकर कृषि कार्य करते हैं। उनका कहना है कि इस वर्ष शुरुआती दौर में हुई बारिश का पर्याप्त लाभ खेतों को नहीं मिल पाया। तेज बारिश का पानी जंगल, नदी और नालों की ओर बह गया, जबकि कई खेतों में फसलों के लिए जरूरी नमी लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी। इसके बाद बारिश में कमी आने से फसलों की स्थिति और खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

वनांचल क्षेत्र में रहने वाले अनेक आदिवासी परिवारों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। खेती से प्राप्त उपज से ही परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई तथा अन्य खर्चों का प्रबंधन किया जाता है। ऐसे में फसल खराब होने की स्थिति में ग्रामीण परिवारों की आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। मनोज साक्षी ने कहा कि प्रभावित किसानों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रशासन को गांव-गांव जाकर खेतों का निरीक्षण करना चाहिए और फसल नुकसान का निष्पक्ष आकलन करना चाहिए।

उन्होंने शासन से मांग की कि जिन क्षेत्रों में फसलें बारिश की कमी के कारण प्रभावित हुई हैं, वहां आवश्यक प्रक्रिया के तहत स्थिति का आकलन कर किसानों को फसल मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। साथ ही वनांचल क्षेत्र की परिस्थितियों को देखते हुए सूखा घोषित करने पर भी विचार किया जाए। उन्होंने किसानों के कर्ज के संबंध में राहत देने तथा प्रभावित गरीब मजदूर परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग रखी, ताकि फसल खराब होने की स्थिति में उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित न हो।

मनोज साक्षी ने कहा कि किसानों को समय पर राहत और रोजगार के अवसर मिलने से वे आर्थिक दबाव का सामना कर सकेंगे। उन्होंने शासन-प्रशासन से वनांचल क्षेत्रों में फसलों की वर्तमान स्थिति की गंभीरता से समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।