मुख्यमंत्री की पत्रकार वार्ता पर दीपक बैज का पलटवार, मनरेगा को कमजोर करने का लगाया आरोप

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री की पत्रकार वार्ता पर पलटवार करते हुए भाजपा सरकार पर मनरेगा के मूल स्वरूप को बदलने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अब योजना में रोजगार देने के बजाय निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे ग्रामीण मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ेगा। कांग्रेस ने सरकार से मनरेगा के तहत रोजगार के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।

Aug 7, 2026 - 16:53
 0  3
मुख्यमंत्री की पत्रकार वार्ता पर दीपक बैज का पलटवार, मनरेगा को कमजोर करने का लगाया आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l मुख्यमंत्री की हालिया पत्रकार वार्ता के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में मनरेगा को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मनरेगा के मूल उद्देश्य को बदल रही है। उनका कहना है कि अब योजना की प्राथमिकता ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों को बढ़ावा देना बन गई है, जिससे गरीब और श्रमिक वर्ग के हित प्रभावित होंगे।

दीपक बैज ने कहा कि मनरेगा की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी देने के उद्देश्य से की गई थी। लेकिन वर्तमान में सरकार द्वारा योजना के तहत स्कूलों में शौचालय, मुक्तिधाम और अन्य निर्माण कार्यों को शामिल किया जा रहा है। उनका दावा है कि ऐसे कार्यों में मजदूरों की अपेक्षा निर्माण सामग्री और मशीनों का उपयोग अधिक होगा, जिससे मजदूरों को मिलने वाला रोजगार घटेगा और योजना की मूल भावना कमजोर होगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा को अप्रत्यक्ष रूप से बंद करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। उनके अनुसार, पहले योजना का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना था, लेकिन अब इसका स्वरूप बदलकर निर्माण कार्यों पर अधिक जोर दिया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे योजना के बजट का बड़ा हिस्सा मजदूरी के बजाय निर्माण सामग्री और मशीनों पर खर्च होगा, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को नुकसान होगा।

दीपक बैज ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा योजना के स्वरूप में बदलाव किए जाने के बाद से ही आशंका थी कि मनरेगा के मूल उद्देश्य को कमजोर किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के हालिया फैसलों ने इस आशंका को और मजबूत किया है। उनका कहना है कि सड़क, पुल-पुलिया, सामुदायिक भवन, स्कूल भवन और अन्य निर्माण कार्य पहले से ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत किए जाते रहे हैं, इसलिए मनरेगा को केवल रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजना के रूप में ही संचालित किया जाना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हर वर्ष लगभग 18 करोड़ कार्य दिवस सृजित किए जाते थे, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिलता था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रदेश के अनेक गांवों में मनरेगा के कार्य प्रभावित हुए हैं और मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि रोजगार के अभाव में कई परिवार पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रदेश में वर्तमान में कितने स्थानों पर मनरेगा के कार्य संचालित हो रहे हैं और पिछले दो वर्षों में योजना के तहत कितने लोगों को रोजगार दिया गया, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए। पार्टी का कहना है कि इससे योजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और जनता के सामने तथ्य आएंगे। कांग्रेस ने दोहराया कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए महत्वपूर्ण रोजगार योजना है और इसे अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप संचालित किया जाना चाहिए। वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक और जनसामान्य की नजर बनी हुई है।