MCB शिक्षा विभाग में नियमों पर सवाल: ओपन स्कूल परीक्षा से पहले अटैचमेंट और नियुक्तियों पर उठे विवाद

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की परीक्षाओं से पहले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में की गई नियुक्तियों और अटैचमेंट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि शासन के निर्देशों की अनदेखी कर कुछ नियुक्तियां प्रभाव और रसूख के आधार पर की गई हैं।

Mar 10, 2026 - 16:40
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MCB शिक्षा विभाग में नियमों पर सवाल: ओपन स्कूल परीक्षा से पहले अटैचमेंट और नियुक्तियों पर उठे विवाद

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र शुक्ला, कोरिया | छत्तीसगढ़ के Manendragarh Chirmiri Bharatpur District (MCB) जिले में शिक्षा विभाग एक बार फिर चर्चा में है। आगामी Chhattisgarh State Open School की परीक्षाओं से पहले जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में की गई कुछ नियुक्तियों और अटैचमेंट को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि परीक्षा केंद्रों से जुड़ी जिम्मेदारियों के निर्धारण में शासन के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

सूत्रों के अनुसार राज्य ओपन स्कूल की परीक्षाएं 16 मार्च से शुरू होने जा रही हैं। इसके पहले जारी किए गए एक आदेश में यह स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि जिस स्कूल में परीक्षा केंद्र बनाया गया है, वहां का स्थानीय स्टाफ केंद्राध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना है, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी या पक्षपात की संभावना न रहे।

हालांकि जिले में कुछ केंद्रों पर की गई नियुक्तियों को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ शिक्षकों को स्कूलों से हटाकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच किया गया और बाद में उन्हें परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप दी गईं। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है।

इस पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यदि परीक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात की आशंका बनती है तो इससे न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य पर भी इसका असर पड़ सकता है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने यह भी कहा है कि परीक्षा से जुड़े सभी निर्णय पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार होने चाहिए। इससे न केवल विभाग की साख बनी रहती है बल्कि छात्रों और अभिभावकों का विश्वास भी कायम रहता है।

मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन से भी स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है। कुछ सामाजिक संगठनों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि यदि कहीं भी नियमों की अनदेखी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होती है। परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना प्रशासन और शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए किसी भी प्रकार के विवाद या आरोप सामने आने पर समय रहते जांच और आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। यदि आवश्यकता पड़ी तो जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नियुक्तियों और अटैचमेंट को लेकर उठ रहे सवाल कितने सही हैं और इसमें किस स्तर तक नियमों का पालन किया गया है।

जिले के विद्यार्थी और अभिभावक भी चाहते हैं कि आगामी परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न हों, ताकि किसी भी छात्र के भविष्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।