सम्मेलन की तैयारियों को लेकर हाल ही में ग्राम गुहाननाला में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज के विभिन्न पदाधिकारियों और सदस्यों की उपस्थिति में आयोजन की रूपरेखा और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान सम्मेलन को सफल बनाने के लिए विभिन्न जिम्मेदारियां भी तय की गईं।
बैठक के दौरान तहसील अध्यक्ष ने सम्मेलन की जिम्मेदारी उपक्षेत्र Dugli के क्षेत्रीय अध्यक्ष को सौंपते हुए उन्हें समाज का सप्तरंगी गोंडवाना ध्वज प्रदान किया। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजनों ने सम्मेलन को समाज की एकता और संगठन को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच बताया।
आगामी सम्मेलन में गोंडवाना समाज की परंपराओं, संस्कृति, कला और साहित्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही समाज के विकास और जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सम्मेलन में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान समाज में बढ़ती सामाजिक चुनौतियों जैसे धर्मांतरण, नशा मुक्ति और शिक्षा जागरूकता जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। समाज के विद्वान और वक्ता इन विषयों पर अपने विचार रखेंगे और समाज को जागरूक करने का प्रयास करेंगे।
सम्मेलन में सामाजिक प्रकरणों पर चर्चा के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से गोंडवाना समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजन से समाज में आपसी भाईचारा, एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में मदद मिलती है।
इस अवसर पर समाज के संरक्षक एवं पूर्व विधायक Shravan Markam, तहसील अध्यक्ष Tikeshwar Dhruv, उपाध्यक्ष Joharlal Chandravanshi सहित समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य बैठक में उपस्थित रहे। इनके अलावा जितेंद्र कुंजाम, भगवान सिंह नेताम, मयाराम नागवंशी, मोहन सिंह कुर्रू, दलगंजन मरकाम, आर.डी. नेताम, सतरूपा तमोंवंशी, राजकुंवर मंडावी, शत्रुघ्न साक्षी, पिंगल गोटा, सुरेंद्र नेताम, बुधराम नेताम, डोमार ध्रुव, विशाली राम ध्रुव, हरक मंडावी, संतोष नेताम, राजू कावड़े, सोनाराम नेताम, वेदप्रकाश मंडावी, राजेश मरकाम, बालाराम मंडावी, चिंताराम तुमरेटी और बलराम सोरी सहित समाज के अनेक पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।
आयोजकों ने बताया कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गोंडवाना समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर सामाजिक एकता को मजबूत करना, समाज की परंपराओं को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को समाज की संस्कृति और मूल्यों से जोड़ना है। सम्मेलन के माध्यम से समाज के विकास से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक चर्चा कर आगे की रणनीति भी तय की जाएगी।