जिले में बढ़ते जल संकट को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai और उप मुख्यमंत्री व पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री Vijay Sharma की प्रेरणा से ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य “गांव का पानी गांव में और घर का पानी घर में” रोककर भू-जल स्तर को बेहतर बनाना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।
कलेक्टर Gopal Verma के निर्देश पर जिले में कई स्थानों पर बंजर भूमि को विकसित करते हुए कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है। जनपद पंचायत Sahaspur Lohara के अंतर्गत ग्राम पंचायत गंगापुर के ग्राम Koraidongri Village में लगभग 15.48 एकड़ बंजर भूमि पर 2,511 कंटूर ट्रेंच बनाए गए हैं। वहीं ग्राम पंचायत Barodakala Village में लगभग 13.70 एकड़ भूमि पर 2,464 कंटूर ट्रेंच का निर्माण पूरा किया गया है।
कंटूर ट्रेंच जैसी संरचनाओं से वर्षा जल का बेहतर संचयन होता है। इससे भू-जल स्तर में सुधार, मृदा संरक्षण और क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत गंगापुर में कंटूर ट्रेंच निर्माण से ग्रामीणों को 2,564 मानव दिवस का रोजगार मिला है, जिसके लिए लगभग 6,69,204 रुपए मजदूरी का भुगतान किया गया। इसी प्रकार ग्राम पंचायत बड़ौदाकला में 2,485 मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया, जहां ग्रामीणों को करीब 6,48,585 रुपए की मजदूरी दी गई।
इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी Abhishek Agrawal ने कहा कि गिरते भू-जल स्तर को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण केवल कृषि के लिए ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और स्वयं सहायता समूहों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है।
आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए जिले में मनरेगा योजना के तहत 2434 विभिन्न कार्यों को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत लगभग 55 करोड़ 91 लाख 70 हजार रुपए है। इनमें निजी डबरी, सामुदायिक रिचार्ज पिट, सिंचाई नाली निर्माण, नया तालाब निर्माण, वृक्षारोपण और नाला पुनरुद्धार जैसे कई कार्य शामिल हैं।
इन योजनाओं के माध्यम से एक ओर जहां बड़े पैमाने पर जल संरक्षण की दिशा में काम हो रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से जिले में जल संकट को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।