छिंदवाड़ा में प्राकृतिक जैविक खेती को बढ़ावा, दीदियों को विपणन और उत्पादन की दी गई विस्तृत जानकारी
छिंदवाड़ा जिला पंचायत सभागृह में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 35 दीदियों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के उत्पादन, विपणन और जैविक हाट बाजार में बिक्री की विस्तृत जानकारी दी गई। भोपाल से आए विशेषज्ञ ने जैविक खेती को आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. वीरेंद्र यादव, छिंदवाड़ा l छिंदवाड़ा जिला पंचायत सभागृह में जिले के विभिन्न विकासखंडों से आई 35 दीदियों के साथ प्राकृतिक एवं जैविक खेती के परिदृश्य पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को जैविक खेती के प्रति जागरूक करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना रहा।
कार्यशाला में ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक, संजय डेहरिया, सूरज माहोरे, अरविंद पटेल, आनंद साहू सहित अन्य अधिकारी एवं मास्टर ट्रेनर सुंदरलाल नागवंशी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भोपाल से आए प्राकृतिक जैविक मिशन के सदस्य एवं सलाहकार डॉक्टर परशुराम तिवारी ने विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया।
डॉक्टर तिवारी ने दीदियों को प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि रासायनिक खेती की तुलना में जैविक खेती न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित है, बल्कि इससे उत्पादित फसलें, सब्जियां और औषधीय पौधे अधिक स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। उन्होंने जैविक उत्पादों की बढ़ती बाजार मांग पर भी प्रकाश डाला और कहा कि यदि किसान समूह सही तरीके से उत्पादन और विपणन करें तो उन्हें अधिक आय प्राप्त हो सकती है।
उन्होंने दीदियों को यह भी बताया कि जैविक खेती से प्राप्त फसलों को स्थानीय स्तर पर जैविक हाट बाजार में बेचकर बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में यह भी चर्चा की गई कि ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं सहायता समूह अपने-अपने विकासखंडों में प्राकृतिक खेती को अपनाकर इसे एक सफल आजीविका मॉडल के रूप में विकसित कर सकते हैं। इससे न केवल कृषि लागत कम होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।
मास्टर ट्रेनर सुंदरलाल नागवंशी ने भी अपने अनुभव साझा किए और दीदियों को जैविक खेती की तकनीकों के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद यदि किसान समूह नियमित रूप से जैविक विधियों को अपनाते हैं तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
कार्यशाला के अंत में भोपाल से आए डॉक्टर तिवारी का आभार व्यक्त किया गया। सभी प्रतिभागियों ने इस पहल को ग्रामीण महिलाओं के लिए एक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने भरोसा जताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं जिले में जैविक खेती के विस्तार में अहम भूमिका निभाएंगी और आने वाले समय में यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगा।