भू-माफिया प्रकरण में बड़ा खुलासा: सत्र न्यायालय ने खात्मा आदेश निरस्त किया, पुलिस विवेचना पर भी उठे सवाल
तिल्दा-नेवरा के चर्चित भूमि फर्जीवाड़ा मामले में सत्र न्यायालय ने खात्मा रिपोर्ट स्वीकार करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के समुचित परीक्षण की आवश्यकता बताते हुए मामले को पुनः विचार के लिए भेजा। वहीं पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट में तत्कालीन थाना प्रभारी की विवेचना पर भी सवाल उठाए गए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l तिल्दा-नेवरा के बहुचर्चित भूमि फर्जीवाड़ा प्रकरण में सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए थाना तिल्दा-नेवरा द्वारा प्रस्तुत खात्मा रिपोर्ट स्वीकार करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार सिंह ने अपने आदेश में कहा कि मामले में उपलब्ध राजस्व अभिलेखों, सीमांकन प्रतिवेदन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का समुचित परीक्षण किए बिना खात्मा रिपोर्ट स्वीकार की गई थी। न्यायालय ने प्रकरण को पुनः विधि अनुसार विचार और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित न्यायालय को वापस भेज दिया है।
यह मामला तिल्दा विकासखंड के ग्राम पंचायत तुलसी में कथित भूमि फर्जीवाड़े से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार राजकुमार भिखवानी पर लगभग 30 हजार वर्गफीट भूमि के स्थान पर करीब 42 हजार वर्गफीट क्षेत्र में प्लॉटिंग कर बिक्री करने का आरोप है। मामले को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है और शिकायतकर्ता अधिवक्ता केशव शरण वैष्णव लगातार कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि न्यायालय के निर्देशों और कई शिकायतों के बावजूद थाना तिल्दा-नेवरा ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि विवेचना के दौरान उच्च अधिकारियों और न्यायालय के समक्ष मामले के तथ्यों को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे जांच प्रभावित हुई।
प्रकरण में एक नया मोड़ तब आया जब पुलिस अधीक्षक महासमुंद द्वारा पुलिस महानिदेशक को भेजी गई जांच रिपोर्ट में तत्कालीन थाना प्रभारी अविनाश सिंह की विवेचना पर गंभीर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट में शिकायत के विभिन्न बिंदुओं की जांच के बाद एक महत्वपूर्ण आरोप को प्रथम दृष्टया प्रमाणित माना गया। इससे मामले की जांच प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
केशव शरण वैष्णव का आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण विवेचना निष्पक्ष तरीके से नहीं की गई। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेश पर दर्ज अपराध क्रमांक 74/2024 में उपलब्ध सीमांकन प्रतिवेदन, राजस्व अभिलेख, सरकारी दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का समुचित परीक्षण किए बिना आरोपियों के पक्ष में खात्मा रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई। हालांकि पुनरीक्षण न्यायालय ने इन दस्तावेजों के दोबारा परीक्षण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए खात्मा आदेश को निरस्त कर दिया।
शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि राजकुमार भिखवानी के विरुद्ध एसडीएम तिल्दा-नेवरा द्वारा पंचायती राज अधिनियम की धारा 61(क), 61(ख), 61(ग) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत कार्रवाई के निर्देश थाना तिल्दा-नेवरा को दिए गए थे। उनका आरोप है कि आदेश जारी होने के बावजूद अब तक अपराध दर्ज नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण से यह प्रतीत होता है कि तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा आरोपियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया तथा वर्तमान में भी आरोपियों को संरक्षण मिलने के आरोप लगाए गए हैं। इस प्रकरण में राजकुमार भिखवानी, सुरेश भिखवानी, दिव्या तनेजा और सुभाष टंडन उर्फ सुभाषिनी साहू को आरोपी बनाया गया है।
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता किशोर ताम्रकार, लुकेश मिश्रा, आकाश हिंदुजा, एन. के. ठाकुर, एम. के. वर्मा, राम वाधवा, के. पी. वर्मा सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पैरवी की। अब सत्र न्यायालय के आदेश के बाद इस चर्चित भूमि फर्जीवाड़ा मामले में आगे की न्यायिक और पुलिस कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।