प्रदर्शनकारियों ने अपने ज्ञापन में 16 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश का हवाला दिया। उनके अनुसार, देश की विभिन्न जेलों में बंद 70 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों के संबंध में न्यायालय ने निर्धारित शर्तों के तहत रिहाई पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि आशाराम बापू की उम्र 89 वर्ष है और वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जोधपुर जेल प्रशासन की देखरेख में उनका उपचार जारी है। इसी आधार पर प्रदर्शनकारियों ने न्यायालय के आदेश के अनुसार उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की मांग रखी।
ज्ञापन में आशाराम बापू से जुड़े विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया गया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उनके अनुयायियों के माध्यम से लंबे समय से आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियां संचालित की जाती रही हैं। उन्होंने बच्चों में संस्कार और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों, पर्यावरण जागरूकता से जुड़े आयोजनों तथा आदिवासी क्षेत्रों में भंडारे और सत्संग जैसी गतिविधियों का उल्लेख किया।
प्रदर्शनकारियों ने गुरुकुल और गौशालाओं के संचालन तथा विभिन्न सेवा गतिविधियों का भी हवाला दिया। ज्ञापन में यह दावा भी किया गया कि आशाराम बापू को वर्ष 2020 में अमेरिका के कैलिफोर्निया विधानसभा की ओर से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उनके अनुयायियों की संख्या को लेकर भी कई दावे किए गए हैं। ये सभी बातें प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन में रखे गए पक्ष के रूप में सामने आई हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आशाराम बापू से जुड़े कानूनी मामले को लेकर भी अपनी आपत्तियां व्यक्त कीं। उन्होंने मामले को गलत बताते हुए उनकी रिहाई की मांग की। हालांकि किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि, निर्दोषता या कानूनी स्थिति का अंतिम निर्धारण संबंधित न्यायालय के आदेश और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होता है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके पक्ष के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
भगवान दिन साहू के अनुसार, इस मांग को लेकर 20 जुलाई 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजा गया था। इसके अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मोबाइल के माध्यम से बातचीत किए जाने और उन्हें व्हाट्सऐप पर पत्र भेजे जाने की जानकारी भी दी गई। आयोजकों ने बताया कि उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से न्यायालय के आदेश की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करने की अपील की।
इस कार्यक्रम में मदन मोहन परसाई, हरशूल रघुवंशी, नितेश साहू, सुभाष इंगले, अशोक साहू, रामाकांत सूर्यवंशी, रामेश्वर कर्मवीर, अंकित ठाकरे, ओमी साहू, गेंदराव कराडे, नारायण हरदिया, शम्भूदयाल साहू, भूपेश पहाड़े, गौरीशंकर धारे, विमल शेरके, डॉ. मीरा पराडकर, करुणेश पाल, शकुंतला कराडे, योगिता पराडकर, रुपाली इंगले, प्रीति सोनोर, छाया परसाई, सुधा ताम्रकार और वर्षा आहूजा सहित कई लोग शामिल रहे। आयोजकों ने लोकसभा अध्यक्ष, राजस्थान सरकार और संबंधित प्रशासन से उनकी मांग पर विचार करने तथा न्यायालय के आदेश का विधिवत पालन सुनिश्चित करने की अपील की।