भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज खिलाड़ी और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में निधन हो गया। कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक और 9 स्वर्ण जीतने वाले राणा ने बतौर कोच भी भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

Jun 12, 2026 - 12:37
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भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

UNITED NEWS OF ASIA. भारतीय खेल जगत के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। देश के महान निशानेबाजों में शामिल जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में नई दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से खेल जगत, शूटिंग समुदाय और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) के पदाधिकारियों ने उनके निधन की पुष्टि की है।

जानकारी के अनुसार जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें नई दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। 1994, 1998, 2002 और 2006 के चार संस्करणों में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। 2002 मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स उनके करियर का सबसे यादगार पड़ाव माना जाता है, जहां उन्होंने कई पदक जीतकर इतिहास रचा।

एशियन गेम्स में भी उन्होंने भारत को कई महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाईं। 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए भारतीय निशानेबाजी को वैश्विक पहचान दिलाई। उनके प्रदर्शन ने देश में शूटिंग खेल को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षण देकर भारतीय शूटिंग को नई दिशा दी। उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल हुए। विशेष रूप से मनु भाकर की उपलब्धियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर द्वारा जीते गए दो पदकों के पीछे भी उनके प्रशिक्षण और मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण माना जाता है।

उनकी उपलब्धियों के सम्मान में उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और बाद में कोचिंग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। खेल के प्रति उनका समर्पण और अनुशासन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, खेल जगत की अनेक हस्तियों और पूर्व खिलाड़ियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें भारतीय खेलों का महान सपूत बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।

जसपाल राणा का निधन भारतीय निशानेबाजी के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है। खिलाड़ी, कोच और मार्गदर्शक के रूप में उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।