भारत में डिजिटल सुरक्षा होगी मजबूत, टेलीकॉम डेटा विदेश भेजने पर रोक; नए नियम लागू

केंद्र सरकार ने टेलीकॉम डेटा की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब टेलीकॉम नेटवर्क से जुड़ा कोई भी डेटा भारत के बाहर स्टोर या ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संरक्षण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी।

Jul 27, 2026 - 16:38
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भारत में डिजिटल सुरक्षा होगी मजबूत, टेलीकॉम डेटा विदेश भेजने पर रोक; नए नियम लागू

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। देश की डिजिटल सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम एक्ट 2023 के तहत नए नियम लागू कर दिए हैं, जिनके अनुसार अब टेलीकॉम नेटवर्क से जुड़ा कोई भी महत्वपूर्ण डेटा भारत के बाहर न तो स्टोर किया जा सकेगा और न ही किसी विदेशी सर्वर पर ट्रांसफर किया जा सकेगा। इस फैसले का उद्देश्य देश की संवेदनशील दूरसंचार जानकारी को सुरक्षित रखना और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक मजबूत बनाना है।

नए नियमों के लागू होने के बाद मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने वाली कंपनियां, सैटेलाइट गेटवे ऑपरेटर, इंटरनेट बैकबोन सेवा प्रदाता तथा क्लाउड आधारित टेलीकॉम नेटवर्क संचालित करने वाली संस्थाओं को अपना पूरा टेलीकॉम डेटा भारत में ही सुरक्षित रखना होगा। इसमें नेटवर्क रिकॉर्ड, सिस्टम लॉग, तकनीकी डेटा और संचालन से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि डेटा लोकलाइजेशन से संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा बेहतर होगी और किसी भी साइबर हमले, तकनीकी संकट या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में त्वरित कार्रवाई करना आसान होगा। विदेशी सर्वरों पर डेटा रखने से जुड़े संभावित सुरक्षा जोखिमों को भी इस व्यवस्था से काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

नए नियमों के तहत केंद्र सरकार और अधिकृत एजेंसियों को आवश्यकता पड़ने पर किसी भी टेलीकॉम कंपनी के नेटवर्क, डेटा सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण एवं ऑडिट करने का अधिकार दिया गया है। यदि किसी मामले का संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से होगा तो संबंधित एजेंसियां बिना पूर्व सूचना के भी जांच कर सकेंगी। इससे सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने और संभावित खतरों की समय रहते पहचान करने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से देश के डेटा सेंटर उद्योग को भी बड़ा लाभ मिल सकता है। चूंकि अब टेलीकॉम कंपनियों को अपना पूरा डेटा भारत में ही संग्रहित करना होगा, इसलिए नए डेटा सेंटर स्थापित करने की मांग बढ़ेगी। इससे इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही स्थानीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार होने की संभावना है।

सरकार ने क्लाउड आधारित टेलीकॉम नेटवर्क सेवाओं के लिए भी नई व्यवस्था लागू की है। इससे नई कंपनियों और स्टार्टअप्स को आधुनिक डिजिटल नेटवर्क सेवाओं तक आसान पहुंच मिल सकेगी। कम लागत में अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध होने से डिजिटल सेवाओं का विस्तार तेज होगा और दूरसंचार क्षेत्र में नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

दूरसंचार विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नियमों के पालन में किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। कंपनियां नेटवर्क तैयार करने या डेटा को भारत में स्थानांतरित करने में सरकारी मंजूरी या अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं का बहाना नहीं बना सकेंगी। सभी सेवा प्रदाताओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक बदलाव पूरे करने होंगे और भारतीय डेटा को स्थानीय सर्वरों पर सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार डेटा लोकलाइजेशन केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को ही मजबूत नहीं करेगा, बल्कि भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को भी अधिक आत्मनिर्भर बनाएगा। इससे डेटा पर देश का नियंत्रण बढ़ेगा, साइबर सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य में सुरक्षित एवं विश्वसनीय डिजिटल सेवाओं के विकास को नई गति मिलेगी।