कर्नाटक के सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ दो पद गाने का आदेश, कांग्रेस सरकार के फैसले पर सियासी विवाद

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राजकीय कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो पद गाने का निर्देश दिया है। हालांकि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और केंद्र सरकार के प्रतिनिधित्व वाले कार्यक्रमों में पूरा राष्ट्रगीत गाए जाने की बात कही गई है। फैसले को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

Sep 10, 2026 - 16:32
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कर्नाटक के सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ दो पद गाने का आदेश, कांग्रेस सरकार के फैसले पर सियासी विवाद

UNITED NEWS OF ASIA. वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण को लेकर देश में चल रहा राजनीतिक और वैचारिक विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राजकीय कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो पद गाए जाने को लेकर निर्देश जारी किया है। हालांकि आदेश में कुछ विशेष परिस्थितियों में वंदे मातरम के सभी छह पद गाए जाने की व्यवस्था भी बताई गई है। इस फैसले के बाद कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।

कर्नाटक सरकार के निर्देश के अनुसार, राज्य सरकार के अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। वहीं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में तथा ऐसे आयोजनों में, जिनका प्रतिनिधित्व केंद्र सरकार की ओर से किया जा रहा हो, वंदे मातरम के सभी छह पद गाए जाने की बात कही गई है। इस तरह राज्य सरकार ने सामान्य राजकीय आयोजनों और विशेष संवैधानिक अथवा केंद्र सरकार से जुड़े कार्यक्रमों के लिए अलग व्यवस्था निर्धारित की है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार की ओर से वंदे मातरम के सभी छह पदों को आधिकारिक कार्यक्रमों में गाए जाने को लेकर दिशानिर्देश जारी किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत के आयोजन से संबंधित प्रोटोकॉल को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह पदों को बजाने या गाने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था।

कांग्रेस ने पहले ही इस व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी। पार्टी की ओर से कहा गया था कि उसके कार्यक्रमों में वंदे मातरम के शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। अब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के इस निर्देश को उसी राजनीतिक रुख से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के आदेश के बाद भाजपा समेत अन्य दलों की ओर से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है।

वहीं जम्मू-कश्मीर में भी वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण को लेकर कांग्रेस के भीतर से आपत्ति सामने आई है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख तारिक हमीद कर्रा ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन कार्यक्रम में गठबंधन सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा पूरा वंदे मातरम गाए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और परंपराओं का देशवासियों के दिल में विशेष स्थान है, लेकिन ऐसे विषयों पर संवैधानिक मूल्यों और देश की विविधता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

कर्रा ने अपने बयान में इस विवाद को देशभक्ति से अधिक संवैधानिक सोच से जुड़ा विषय बताया। उनका तर्क था कि आजादी के बाद अपनाए गए संस्करण में देश की विविधता और संवैधानिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश की गई थी।

इसके जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कांग्रेस पर ही सवाल उठाया। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस शासित राज्य में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मौजूदगी में वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया था। सादिक ने इसी घटना का वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस नेताओं से अपने ही मुख्यमंत्रियों के फैसलों पर भी ध्यान देने की बात कही।

वंदे मातरम के कितने पद आधिकारिक कार्यक्रमों में गाए जाएं, इस मुद्दे ने अब राजनीतिक और संवैधानिक बहस का रूप ले लिया है। कर्नाटक सरकार का ताजा आदेश इस विवाद को और चर्चा में ले आया है। आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य के प्रोटोकॉल के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के रुख को लेकर इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।