बताया गया है कि विशेष रूप से 50 हजार रुपये तक की साइबर ठगी की राशि यदि शिकायत के बाद होल्ड हो जाती है, तो पात्र पीड़ित MRM पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर राशि वापस पाने की प्रक्रिया का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए पीड़ित को साइबर ठगी की घटना के बाद बिना देरी किए संबंधित माध्यम से शिकायत दर्ज कराना जरूरी है। राशि जितनी जल्दी रिपोर्ट की जाती है, उतनी ही जल्दी संबंधित सिस्टम में उसके ट्रांजेक्शन को ट्रैक कर आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
पुलिस कमिश्नरेट रायपुर के थाना गुढ़ियारी क्षेत्र निवासी रजनीश गुप्ता से जुड़ा मामला भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार उनके साथ साइबर ठगी हुई थी और 30 हजार रुपये की राशि होल्ड की गई थी। इसके बाद MRM पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया गया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन दिनों के भीतर 20 हजार रुपये की राशि उनके बैंक खाते में वापस प्राप्त हुई। यह मामला साइबर ठगी के बाद तत्काल शिकायत करने और उपलब्ध रिस्टोरेशन प्रक्रिया का उपयोग करने के महत्व को दर्शाता है।
साइबर ठगी होने पर सबसे जरूरी कदम तत्काल शिकायत करना है। पीड़ित को राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही साइबर अपराध की ऑनलाइन शिकायत cybercrime.gov.in के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती है। शिकायत करते समय ठगी से संबंधित ट्रांजेक्शन की जानकारी, बैंक या डिजिटल पेमेंट से जुड़े विवरण और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखना उपयोगी होता है। शिकायत के बाद यदि संबंधित राशि होल्ड होती है, तो पात्रता के अनुसार MRM पोर्टल के जरिए उसे वापस पाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
साइबर अपराध के मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ठगी की रकम एक खाते से दूसरे खाते में तेजी से ट्रांसफर हो सकती है, इसलिए घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद शिकायत करना जरूरी है। देर होने पर रकम को ट्रेस करना और उसे रोकना कठिन हो सकता है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग जानकारी साझा करने या संदिग्ध लिंक पर भुगतान करने के बाद यदि ठगी का संदेह हो, तो तुरंत 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि साइबर ठगी से संबंधित MRM पोर्टल और राशि वापसी की प्रक्रिया की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। हालांकि, राशि वापस मिलना मामले की परिस्थितियों, राशि के होल्ड होने और पात्रता समेत संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी साइबर ठगी के बाद शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए और उपलब्ध आधिकारिक माध्यमों से ही कार्रवाई करनी चाहिए। साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता और समय पर शिकायत ही ऑनलाइन ठगी से होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।