कार्यशाला में कक्षा दसवीं और बारहवीं के लगभग 150 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इन विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के बाद प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए। माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी प्रशिक्षण में शामिल होने की इच्छा जताई, जिसके बाद उन्हें भी कार्यशाला से जोड़ा गया। इस तरह भावना दीदी की साइंस पाठशाला की पहली कार्यशाला में कुल 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लेकर आधुनिक तकनीकों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को जानने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और 3D प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की बुनियादी जानकारी दी गई। इसके साथ ही मोबाइल लैब के माध्यम से बस टूर का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों ने तकनीकी शिक्षा से जुड़े विभिन्न प्रदर्शनों और मॉडलों को करीब से देखा। विद्यार्थियों को अलग-अलग तकनीकी उपकरणों और प्रयोगों के बारे में जानकारी दी गई, जिससे उन्हें किताबों में पढ़े जाने वाले विज्ञान के सिद्धांतों को वास्तविक प्रयोगों से जोड़कर समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला में टेबलटॉप प्रदर्शनी के साथ STEM और फिजिक्स किट का प्रदर्शन भी किया गया। STEM इलेक्ट्रॉनिक किट तथा फिजिक्स किट के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों को प्रयोगात्मक तरीके से समझाया गया। बच्चों ने स्वयं प्रयोगों में हिस्सा लिया और विज्ञान को व्यवहारिक रूप से सीखने का अनुभव प्राप्त किया। इस तरह कार्यशाला का फोकस केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय विद्यार्थियों में प्रयोग करने, सवाल पूछने और नई चीजों को समझने की जिज्ञासा विकसित करने पर रहा।
पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कहा कि गांवों और शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत उन्हें अवसर, संसाधन और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि भावना दीदी की साइंस पाठशाला इसी सोच के साथ शुरू की गई है, ताकि पंडरिया विधानसभा के शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे ड्रोन, रोबोटिक्स, AI, STEM, 3D प्रिंटिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों को सीख सकें। उनके अनुसार आज की शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि बच्चों को प्रयोग, तकनीक और नवाचार से जोड़ना जरूरी है।
भावना बोहरा ने बताया कि इस पहल के माध्यम से आने वाले समय में पंडरिया विधानसभा के शासकीय एवं शिशु मंदिर विद्यालयों के करीब 5,000 विद्यार्थियों तक हर वर्ष पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब के माध्यम से विद्यालय-विद्यालय जाकर विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना है। पहल का उद्देश्य बच्चों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रयोग करने की क्षमता और नवाचार के प्रति आत्मविश्वास विकसित करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी भी भविष्य की तकनीकों को समझकर शिक्षा और करियर के नए अवसरों की ओर आगे बढ़ सकें।