गरियाबंद पुलिस का साइबर जागृति अभियान, गांव-गांव पहुंचकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों को किया जागरूक

गरियाबंद पुलिस ने साइबर जागृति अभियान के तहत जिले के गांवों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों और ग्रामीण महिलाओं को साइबर अपराध से बचाव के उपाय बताए। पुलिस ने OTP, UPI PIN, पासवर्ड और संदिग्ध लिंक को लेकर सावधानी बरतने की अपील की।

Sep 9, 2026 - 18:44
Sep 9, 2026 - 18:46
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गरियाबंद पुलिस का साइबर जागृति अभियान, गांव-गांव पहुंचकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों को किया जागरूक

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय के आह्वान पर पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान के तहत गरियाबंद जिले में 9 सितंबर 2026 को व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर के निर्देशन में जिले के सभी थानों की पुलिस टीमों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों और स्थानीय महिलाओं के लिए विशेष जागरूकता चौपाल एवं कार्यक्रम आयोजित किए। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करना और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के बारे में जानकारी देना रहा।

पुलिस टीमों ने गांव-गांव जाकर महिलाओं को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले अलग-अलग तरीकों के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि डिजिटल लेनदेन और मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के बीच थोड़ी सी लापरवाही आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। कार्यक्रमों में पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं को साइबर ठगी के संभावित तरीकों को पहचानने और किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन गतिविधि पर सावधानी बरतने की सलाह दी।

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने सबसे महत्वपूर्ण रूप से बैंक खाता नंबर, एटीएम पिन, यूपीआई पासवर्ड और ओटीपी की गोपनीयता बनाए रखने की जानकारी दी। पुलिस ने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध कॉल करने वाले के साथ ऐसी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही मोबाइल पर आने वाले लॉटरी, लोन, मुफ्त उपहार या अन्य आकर्षक ऑफर से जुड़े अज्ञात लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी गई। साइबर अपराधी कई बार लोगों को लालच या डर के माध्यम से जल्दबाजी में गलत कदम उठाने के लिए प्रेरित करते हैं, इसलिए किसी भी ऑनलाइन संदेश की विश्वसनीयता जांचना जरूरी बताया गया।

सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर भी महिलाओं को जागरूक किया गया। पुलिस ने निजी तस्वीरें और व्यक्तिगत जानकारियां अजनबियों के साथ साझा नहीं करने, सोशल मीडिया प्रोफाइल को सुरक्षित रखने और मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करने की सलाह दी। इसके अलावा सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और वित्तीय सहायता से संबंधित संदिग्ध फोन कॉल या संदेश मिलने पर उसकी पुष्टि आधिकारिक माध्यम से करने को कहा गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर मांगी जाने वाली संवेदनशील बैंकिंग जानकारी को बिना सत्यापन साझा नहीं करना चाहिए।

अभियान के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन ग्रामीण समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं तथा उनकी पहुंच बड़ी संख्या में परिवारों तक होती है। उन्हें साइबर अपराध से बचाव की जानकारी देकर अपने-अपने क्षेत्रों में अन्य ग्रामीणों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल के माध्यम से उन्हें साइबर सखी या साइबर दूत की भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि साइबर सुरक्षा का संदेश गांवों के प्रत्येक परिवार तक पहुंच सके।

पुलिस ने साइबर ठगी का शिकार होने की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने की अपील की। लोगों को राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क करने और आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि ऑनलाइन धोखाधड़ी के बाद जितनी जल्दी शिकायत दर्ज की जाती है, उतनी ही जल्दी संबंधित लेनदेन पर आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।

गरियाबंद पुलिस का यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। पुलिस ने आम लोगों से सतर्क रहने, अपनी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तत्काल सूचना देने की अपील की है।