ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को एक मीडिया टीवी इंटरव्यू के दौरान क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब पर हो रहे हमलों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मक्का समझौते से बंधा हुआ है और इस समझौते के तहत तय जिम्मेदारियों को पूरा करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी आक्रामक कार्रवाई का जवाब हमेशा उसी तरीके से देना जरूरी नहीं होता। उनके अनुसार जवाब देने का तरीका परिस्थितियों और जरूरत के आधार पर तय किया जा सकता है।
रक्षा मंत्री के मुताबिक समझौते को लेकर किसी तरह की अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक संयुक्त रक्षा समझौता है और इसके तहत सदस्य देशों की सुरक्षा को साझा जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाता है। ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया कि यदि समझौते में शामिल किसी देश पर बाहरी आक्रामकता होती है तो अन्य सदस्य देश उसके साथ खड़े हो सकते हैं। हालांकि उनके बयान में तत्काल किसी सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब यमन और उसके आसपास के क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब को निशाना बनाकर किए गए हमलों में शहरों के अलावा आर्थिक और ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। इन घटनाओं के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है और विभिन्न देशों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच अगस्त में मक्का में रक्षा समझौता किए जाने की जानकारी दी गई है। इस समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच सुरक्षा और सैन्य सहयोग को मजबूत करना बताया गया है। समझौते के तहत किसी सदस्य देश पर बाहरी आक्रामकता की स्थिति में अन्य सदस्य देशों के सहयोग की व्यवस्था होने की बात कही गई है। इसी प्रावधान का हवाला देते हुए ख्वाजा आसिफ ने सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता स्पष्ट की है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंध रहे हैं। ऐसे में मक्का समझौते को दोनों देशों के सुरक्षा सहयोग के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। तुर्की की भागीदारी से यह सहयोग तीन देशों के बीच व्यापक सुरक्षा समन्वय की दिशा में भी बढ़ता दिखाई देता है। हालांकि किसी समझौते के वास्तविक प्रभाव और उसके तहत उठाए जाने वाले कदम परिस्थितियों तथा संबंधित देशों के निर्णयों पर निर्भर करते हैं।
ख्वाजा आसिफ के बयान के बाद सऊदी अरब की सुरक्षा और यमन में जारी संघर्ष को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर चर्चा तेज हो सकती है। फिलहाल पाकिस्तान की ओर से सऊदी अरब के समर्थन की राजनीतिक प्रतिबद्धता दोहराई गई है, जबकि किसी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। आने वाले समय में क्षेत्रीय घटनाक्रम और हूती हमलों की स्थिति यह तय करेगी कि मक्का समझौते के तहत पाकिस्तान किस तरह की भूमिका अपनाता है।