केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि हाई डेंसिटी वाले रेलवे रूट को चार लेन करने की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है। प्रस्तावित नेटवर्क में दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली जैसे प्रमुख रेल मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली-गुवाहाटी और अन्य महत्वपूर्ण हाई डेंसिटी सेक्शन को भी इस व्यापक योजना से जोड़ा गया है। इन कॉरिडोर पर अतिरिक्त लाइनें बनने से ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ने वाला रेल नेटवर्क देश के सबसे महत्वपूर्ण हाई डेंसिटी मार्गों में शामिल है। इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता जैसे डायगोनल रूट भी महत्वपूर्ण हैं। इन मार्गों पर यातायात का दबाव अधिक होने के कारण इन्हें चरणबद्ध तरीके से चार लेन करने की योजना बनाई जा रही है। लगभग 4,000 किलोमीटर के रेल नेटवर्क के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
कैबिनेट ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में पांच मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 540 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इनकी अनुमानित लागत करीब 10,021 करोड़ रुपये बताई गई है और इन्हें वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मल्टीट्रैकिंग से व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से संचालित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिलासपुर-कटनी रेल सेक्शन को चार लेन वाले नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना से राज्य को फायदा होने की उम्मीद है। बिलासपुर से पेंड्रा और आगे कटनी की दिशा में कुछ हिस्सों में पहले से तीन रेल लाइनें हैं, जबकि कुछ हिस्सों में दोहरी लाइन मौजूद है। पूरे सेक्शन को अधिक क्षमता वाला बनाने से छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क को मजबूती मिल सकती है।
मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी नेटवर्क के तहत खड़गपुर से झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेल लाइन को भी मंजूरी दी गई है। इस सेक्शन की लंबाई करीब 367 किलोमीटर बताई गई है और परियोजना पर लगभग 6,528 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसी तरह अरक्कोनम से रेणिगुंटा के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन विकसित करने की योजना है। इस सेक्शन की लंबाई करीब 77 किलोमीटर होगी और इसके लिए लगभग 1,936 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान बताया गया है।
रेलवे नेटवर्क के विस्तार का असर पर्यटन और धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी पर भी पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में अचनकमार टाइगर रिजर्व, रतनपुर महामाया मंदिर, खुटाघाट बांध, अमरकंटक और ज्वालेश्वर धाम जैसे स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इसके अलावा झारसुगुड़ा का जगन्नाथ मंदिर, तारातारिणी मंदिर और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व जैसे प्रमुख स्थलों की यात्रा भी आसान हो सकती है। सरकार के इस फैसले से रेलवे की क्षमता बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।