औचक निरीक्षण के दौरान श्रीजल कृषि केंद्र और आहान कृषि केंद्र, देवकर में कीटनाशकों के विक्रय से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में दोनों प्रतिष्ठानों में कीटनाशकों के विक्रय के लिए अनुमोदित स्त्रोत प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं पाया गया। इसके बाद संबंधित कीटनाशकों के विक्रय पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई की गई। कृषि विभाग ने यह कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत की है, ताकि किसानों को ऐसे कृषि आदान उपलब्ध न हों जिनकी वैधता और अधिकृत स्त्रोत से संबंधित जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं हैं।
विभाग के अनुसार कीटनाशकों की बिक्री और वितरण के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है। कीटनाशक विक्रेताओं को उत्पादों के वैध स्त्रोत और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध रखने होते हैं। निरीक्षण के दौरान आवश्यक प्रमाण पत्र नहीं मिलने पर संबंधित उत्पादों की बिक्री रोकना इसी नियामक प्रक्रिया का हिस्सा है। यह कार्रवाई कीटनाशी अधिनियम, 1968 एवं कीटनाशी नियम, 1971 के प्रावधानों के तहत की गई।
इसी निरीक्षण अभियान के दौरान चंद्राकर कृषि केंद्र, देवकर की भी जांच की गई। यहां रासायनिक उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच के उद्देश्य से चार उर्वरक नमूने लिए गए। इन नमूनों को नियमानुसार परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। प्रयोगशाला से परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसमें सामने आने वाले परिणामों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नमूनों की जांच के परिणाम के अनुसार नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
कृषि विभाग द्वारा इस तरह के निरीक्षण और नमूना संकलन का मुख्य उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराना है। खेती के दौरान किसान बड़ी मात्रा में उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग करते हैं। ऐसे में इन उत्पादों की गुणवत्ता और वैधानिक बिक्री व्यवस्था की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है। कृषि केंद्रों के निरीक्षण से जहां नियमों के पालन की स्थिति की जानकारी मिलती है, वहीं अनियमितता मिलने पर संबंधित उत्पादों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई भी की जा सकती है।
औचक निरीक्षण के दौरान दिनेश कुमार धुर्वे, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, विकासखंड साजा तथा विनय कुमार शर्मा, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कार्यालय साजा उपस्थित रहे। अधिकारियों और कर्मचारियों ने कृषि केंद्रों में उपलब्ध कृषि आदानों तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच की और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की।
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर मोरध्वज डडसेना ने कहा कि जिले में कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निरीक्षण और नमूना संकलन की कार्रवाई लगातार जारी रखी जाएगी। उन्होंने बताया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक और उर्वरक उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए कृषि केंद्रों की नियमित निगरानी के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार औचक निरीक्षण भी किए जाएंगे।
विभाग की इस कार्रवाई से कृषि आदान विक्रेताओं को निर्धारित नियमों और वैधानिक दस्तावेजों के साथ कारोबार करने का संदेश मिला है। वहीं उर्वरक के लिए लिए गए चार नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद उनकी गुणवत्ता की स्थिति स्पष्ट होगी। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग ने संकेत दिया है कि किसानों के हित में गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिले में निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेगा।